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मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

"झूले कैसे पड़ें बाग में?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


आँगन के सब नीम कट गये,
पेड़ आम के जले आग में।
नस्ल विदेशी उगा रहे सब,
झूले कैसे पड़ें बाग में?

बात-बात में झगड़ा-दंगा,
हुआ आदमी कितना नंगा,
समता-ममता रूठ गई है,
धुला न मन का द्वेष फाग में।
नस्ल विदेशी उगा रहे सब,
झूले कैसे पड़ें बाग में?

मौलिक रचना लुप्त हो गई,
नाट्य-कला सब सुप्त हो गई,
भूल गये संगीत सुरीला,
कर्कश सुर आ गये राग में।
नस्ल विदेशी उगा रहे सब,
झूले कैसे पड़ें बाग में?

दूध नही मिलता है असली,
इसीलिए है घी भी नकली,
सेहत कैसे ठीक रहेगी,
जहर मिला है हरे साग में।
नस्ल विदेशी उगा रहे सब,
झूले कैसे पड़ें बाग में?

18 टिप्‍पणियां:

  1. आप की यह रचना 'सचाई'की 'बनावट'पर एक 'मुहर' है |इन शब्दों के साथ वधाई |पुन:वधाए विगत 'वैवाहिक स्मृति-दिवस' की |
    'सांच' को आँच नहीं |
    'हीरा होता 'कांच' नहीं ||
    हम हैं 'सच' के दीवाने' हाँ -
    'झूठ की पुस्तक' बांच नहीं ||

    उत्तर देंहटाएं
  2. मौलिक रचना लुप्त हो गई,
    नाट्य-कला सब सुप्त हो गई,
    भूल गये संगीत सुरीला,
    कर्कश सुर आ गये राग में।

    वाह,,,बहुत लाजबाब रचना....

    recent post: रूप संवारा नहीं,,,

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (12-12-12) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

    उत्तर देंहटाएं
  4. "नस्ल विदेशी उगा रहे सब,
    झूले कैसे पड़ें बाग में?"

    अति सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सही कहा है आपने |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  6. आज का सच आपने दिखाया है इस कविता में।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सही कहा है आज का सच ********^^^^^^^********दूध नही मिलता है असली,
    इसीलिए है घी भी नकली,
    सेहत कैसे ठीक रहेगी,
    जहर मिला है हरे साग में।
    नस्ल विदेशी उगा रहे सब,
    झूले कैसे पड़ें बाग में?

    उत्तर देंहटाएं
  8. पेड़ पौधे विदेशी,
    खान -पान विदेशी ,
    कपडे भी विदेशी .
    विदेशी कपडे में लिपटे नकली देशी .
    आजकल पश्चिमी देशों की नक़ल फैशन है.
    : बहुत अच्छा और सामयिक रचना:
    मेरी नई पोस्ट "गजल "

    उत्तर देंहटाएं
  9. आँगन के सब नीम कट गये,
    पेड़ आम के जले आग में।
    नस्ल विदेशी उगा रहे सब,
    झूले कैसे पड़ें बाग में?

    बस रही सही कसर वालमार्ट पूरी कर देगा।

    उत्तर देंहटाएं
  10. गीत मनोहर रीत मनोहर ,शास्त्री जी की प्रीत मनोहर .

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सार्थक रचना आज की सच्चाई को आइना दिखाती हई बहुत सुन्दर लिखा बधाई आपको

    उत्तर देंहटाएं
  12. बदलती आबोहवा पर करारा कटाक्ष करती, सामाजिक दंश के दर्द को अभिव्यक्त करती इस कविता के लिए मेरी भी बधाई स्वीकार करें शास्त्री जी।

    उत्तर देंहटाएं
  13. एक सच के साथ ...बढिया कटाक्ष

    उत्तर देंहटाएं

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