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शनिवार, 15 दिसंबर 2012

"भारत बहुत महान!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

खादी और खाकी दोनों में छिपे हुए शैतान।
अचरज में है हिन्दुस्तान! 
अचरज में है हिन्दुस्तान!!

तन भूखा है, मन रूखा है खादी वर्दी वालों का,
सुर तीखा है, उर सूखा है खाकी वर्दी वालों का,
डर से इनके सहमा-सहमा सा मजदूर-किसान!
अचरज में है हिन्दुस्तान! 
अचरज में है हिन्दुस्तान!!

खुले साँड संसद में चरते, करते हैं मक्कारी,
बेकसूर थानों  में मरते, जनता है दुखियारी,
कितना शानदार नारा है, भारत बहुत महान!
अचरज में है हिन्दुस्तान! 
अचरज में है हिन्दुस्तान!!

माली लूट रहे हैं बगिया, बन करके सरकारी,
आलू,दाल-भात महँगा है, महँगी हैं तरकारी,
जीने से मरना महँगा है, आफत में इन्सान!
अचरज में है हिन्दुस्तान! 
अचरज में है हिन्दुस्तान!!

मानवता-मर्यादा घुटती खादी के बानों मे,
अबलाओं की लज्जा लुटती सरकारी थानों में,
खादी, खाकी की केंचुलियाँ, नष्ट करो भगवान!
अचरज में है हिन्दुस्तान! 
अचरज में है हिन्दुस्तान!!

8 टिप्‍पणियां:

  1. अनुपम भाव लिये बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वास्तविक चित्र खिचते हुए बेहतरीन रचना -बहुत अच्छा
    मेरी नई पोस्ट 'संस्कृति का संक्रमण'

    उत्तर देंहटाएं
  3. अपने समय से संवाद करती बेहतरीन रचना गेय गीत .आभार हमें चर्चा मंच में बिठाने के लिए .

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बढिया..मेरे दोनो ब्लाग मे आप की प्रतीक्षा है...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति
    मानवता-मर्यादा घुटती खादी के बानों मे,
    अबलाओं की लज्जा लुटती सरकारी थानों में,
    खादी, खाकी की केंचुलियाँ, नष्ट करो भगवान!
    अचरज में है हिन्दुस्तान!
    अचरज में है हिन्दुस्तान!!

    उत्तर देंहटाएं

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