"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

"ग़ज़ल-हमें गाना नहीं आता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


उन्हें सुनना नहीं आता, हमें गाना नहीं आता।
उन्हें चलना नहीं आता, हमें ढोना नहीं भाता।।

बहुत बेदार हैं वो भी, बहुत बेजार हैं हम भी,
उन्हें जगना नहीं आता, हमें सोना नहीं भाता।

बहुत मशहूर हैं वो भी, बहुत मगरूर हैं हम भी,
उन्हें खाना नहीं आता, हमें पीना नहीं भाता।

खुदा का नूर हैं वो भी, नहीं बेनूर हैं हम भी,
उन्हें मरना नहीं आता, हमें जीना नहीं भाता।

विरल हम भी नहीं हैं कुछ, सरल वो भी नहीं है कुछ,
उन्हें खोना नहीं आता, हमें पाना नहीं भाता।

सुहानी धूप का उनको, नशा है "रूप" का उनको,
उन्हें जादू नहीं आता, हमें टोना नहीं भाता।

12 टिप्‍पणियां:

  1. विरल हम भी नहीं हैं कुछ, सरल वो भी नहीं है कुछ,
    उन्हें खोना नहीं आता, हमें पाना नहीं भाता।

    bahut khoob !

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत बढ़िया,,,

    इस सादगी पे उनकी न क्यों जान वारिये,
    कहते है कर सवाल मुझे सब क़ुबूल है,,,,

    उत्तर देंहटाएं

  3. मगर उनके बिना जाहिद हमें जीना नहीं आता ,

    मरना नहीं भाता .

    उत्तर देंहटाएं
  4. खुद हममे हैं इतनी खामियां

    दूसरों की गिनाना नहीं आता
    वैसे किसी को क्या नहीं आता और किसी को क्या नहीं भाता का अच्छा चित्रण ....सादर!





    उत्तर देंहटाएं

  5. खुदा का नूर हैं वो भी, नहीं बेनूर हैं हम भी
    उन्हें मरना नहीं आता, हमें जीना नहीं भाता

    बहुत बढ़िया !
    बहुत सुंदर !

    आदरणीय डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी
    सादर प्रणाम !


    आपकी रचनाओं के लिए क्या कहूं …
    हर रचना सुंदर रचना !
    अप्रतिम ! अद्वितीय ! अलौकिक !


    :)

    शुभकामनाओं सहित…
    राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails