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रविवार, 2 दिसंबर 2012

"बताओ कैसे उतरें पार?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

लिए पुरानी अपनी नौका, टूटी सी पतवार,
बताओ कैसे उतरें पार?
देख रवानी लहरों की, हमने मानी है हार,
बताओ कैसे उतरें पार?

16 टिप्‍पणियां:

  1. हौसलों को परवाज़ दो
    जीवन को आधार दो
    चाहे लहरें कितनी शोर मचायें
    चाहे नौका हो कितनी बेज़ार
    तभी उतरोगे भव से पार

    उत्तर देंहटाएं
  2. छेद नाव में जर्जर-नौका, कभी नहीं नाविक घबराये ।
    जल-जीवन में गहरे गोते, सदा सफलता सहित लगाये ।
    इतना लम्बा जीवन-अनुभव, नाव किनारे पर आएगी -
    पतवारों पर हमें भरोसा, सागर सगरा पार कराये ।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. चलते रहिये, पार मिलेगा,
    इस श्रम का उपहार मिलेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  5. अनुभव की पूँजी से बढ़कर नहीं कोई पतवार
    अपने ऊपर करे भरोसा सच्चा खेवनहार
    भगवान बढ़ाये हाथ उसे जो अडिग रहे मझधार
    बताए कैसे उतरें पार

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 03-12-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1082 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  7. जैसे फोटोशॉप से नाव पर सवार हुए हैं वैसे ही फोटोशॉप पार भी लगा देगा जी। :)

    उत्तर देंहटाएं
  8. अब तो लग गई देख किनारे
    बंधु बांधव भी हैं कितने सारे
    लहरों की अब चिन्‍ता किसको
    पार उतारेंगे मुझको अब सारे।

    उत्तर देंहटाएं
  9. चलते रहिये ...रुक गये तो सब कुछ ख़त्म ...पार अपने आप हो जायेंगे हम गर हौसला रखेंगे हम

    बहुत खूब !

    उत्तर देंहटाएं
  10. आप ऐसे हिम्मत हारने वालों में से नहीं हैं सर !:)
    एक शेर याद आ गया.. शायर का नाम याद नहीं :( ~
    "रख हौसला बुलंद कि वो मंज़र भी आयेगा...
    प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा..."
    ~सादर !!!

    उत्तर देंहटाएं
  11. लिए पुरानी अपनी नौका, टूटी सी पतवार,
    बताओ कैसे उतरें पार?
    देख रवानी लहरों की, हमने मानी है हार,
    बताओ कैसे उतरें पार?

    लहरों के हवाले छोड़ दो नौका .हाँ प्रमाद नहीं दृष्टा भाव से देखो सब -तुलसी भरोसे राम के ,रह्यो खाट पे सोय ,अनहोनी ,होनी नहीं ,होनी होय सो होय .

    उत्तर देंहटाएं
  12. तैरना सीख कर ही नाव मे बैठने मु बुद्धिमानी है बाकी तो ऊपरवाले का ही सहरा है

    उत्तर देंहटाएं

  13. अपनी कविता की चार पंक्तियाँ लिख रही हूँ ...

    डगमगाया है तूफाँ ने जितना
    उतना ही तू दमदार कहीं

    चिड़ियाँ चहचहाती हैं तो जरुर
    सुबह किनारे की है तरफदार कहीं

    उत्तर देंहटाएं

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