"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012

"गधे चबाते हैं काजू, महँगाई खाते बेचारे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!
गधे चबाते हैं काजू,
महँगाई खाते बेचारे!!

काँपे माता काँपे बिटिया, भरपेट न जिनको भोजन है,
क्या सरोकार उनको इससे, क्या नूतन और पुरातन है,
सर्दी में फटे वसन फटे सारे!
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!

जो इठलाते हैं दौलत पर, वो खूब मनाते नया-साल,
जो करते श्रम का शीलभंग,वो खूब कमाते द्रव्य-माल,
वाणी में केवल हैं नारे! 
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!

नव-वर्ष हमेशा आता है, सुख के निर्झर अब तक न बहे,
सम्पदा न लेती अंगड़ाई, कितने दारुण दुख-दर्द सहे,
मक्कारों के वारे-न्यारे! 
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!

रोटी-रोजी के संकट में, नही गीत-प्रीत के भाते हैं,
कहने को अपने सारे हैं, पर झूठे रिश्ते-नाते हैं,
सब स्वप्न हो गये अंगारे!
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!

टूटा तन-मन भी टूटा है, अभिलाषाएँ ही जिन्दा हैं,
आयेगीं जीवन में बहार, यह सोच रहा कारिन्दा हैं,
कब चमकेंगें नभ में तारे! 
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!

19 टिप्‍पणियां:

  1. इस देश की आधी से ज्यादा आबादी तो ऐसी है जिनको नए और पुराने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला ........अच्छी रचना !!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सही कहा, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  3. गधे चबाते हैं काजू,
    महँगाई खाते बेचारे!!

    बहुत सही !

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर यथार्थ की अभिव्यक्ति ****^^^^*****टूटा तन-मन भी टूटा है, अभिलाषाएँ ही जिन्दा हैं,
    आयेगीं जीवन में बहार, यह सोच रहा कारिन्दा हैं,
    कब चमकेंगें नभ में तारे!
    नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह ...वाह एकदम सही है ,
    खाने वाले के पास पेट नही है .......

    उत्तर देंहटाएं
  6. शुभ कामनाओं से प्रेरित तंज भरा गीत नव वर्ष का .बढ़िया प्रासंगिक लेखन .बधाई .


    टूटा तन-मन भी टूटा है, अभिलाषाएँ ही जिन्दा हैं,
    आयेगीं जीवन में बहार, यह सोच रहा कारिन्दा हैं,
    कब चमकेंगें नभ में तारे!
    नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!



    Virendra Sharma ‏@Veerubhai1947
    ram ram bhai मुखपृष्ठ http://veerubhai1947.blogspot.in/ शुक्रवार, 28 दिसम्बर 2012 अतिथि कविता :हम जीते वो हारें हैं

    नव वर्ष में सब शुभ हो आपके गिर्द .

    जीते वह हारे हैं , कैसे अजब नज़ारे हैं .... अधिक »
    अतिथि कविता :हम जीते वो हारें हैं
    ram ram bhaiपरVirendra Kumar Sharma - 6 मिनट पहले
    अतिथि कविता :हम जीते वो हारें हैं -डॉ .वागीश मेहता हम जीते वह हारे हैं ................................... दिशा न बदली दशा न बदली , हारे छल बल सारे हैं , वोटर ने मारे फिर जूते , कैसे अजब नज़ारे हैं . (1) पिछली बार पचास पड़े थे , अबकी बार पड़े उनचास , जूते वाले हाथ थके हैं , हाईकमान को है विश्वास , बंदनवार सजाये हमने , हम जीते वह हारे हैं , कैसे अजब नज़ारे हैं .... अधिक »

    उत्तर देंहटाएं
  7. इक बरहमन ने कहा है की ये साल अच्छा है...

    उत्तर देंहटाएं
  8. नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!
    नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!
    गधे चबाते हैं काजू,
    महँगाई खाते बेचारे!!नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!
    सुन्दर रचना ,आभार सहित ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. कब चमकेंगे नभ में तारे!आशाओं का दामन छूटना नहीं चाहिए ---धन्यवाद ,इस सार्थक रचना के लिए

    उत्तर देंहटाएं
  10. नया वर्ष में नए सितारे का इन्तेजार रहेगा -अच्छी रचना :
    नई पोस्ट :"नया वर्ष मुबारक हो सबको "

    उत्तर देंहटाएं
  11. रोटी-रोजी के संकट में, नही गीत-प्रीत के भाते हैं,
    कहने को अपने सारे हैं, पर झूठे रिश्ते-नाते हैं,
    सब स्वप्न हो गये अंगारे!
    नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!
    बढ़िया ....

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सुन्दर। नव वर्ष-2013 की अग्रिम शुभकामनाओं के साथ। मेरे नए पोस्ट पर आपके प्रतिक्रिया की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी। धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  13. सारी 'मेवा' गधों ने खा ली, 'इंसानों' को मिलेगा क्या ?
    'प्रजा'रहे 'भूखी',सब खा ले 'राजा', देश चलेगा क्या ??

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails