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बुधवार, 12 दिसंबर 2012

"बेरहम संसार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मानवाधिकार
कोई नही सुनता पुकार
आयोग है
राजनीति का शिकार
कहने पर प्रतिबन्ध
सुनने पर प्रतिबन्ध
खाने पर प्रतिबन्ध
पीने पर प्रतिबन्ध
जाने पर प्रतिबऩ्ध
जीने पर प्रतिबऩ्ध
मँहगाई की मार
रिश्वत का बाजार
निर्धन की हार
दहेज की भरमार
नौकरशाही का रौब
पुलिस का खौफ
दलित की पुकार
बेरहम संसार
कानून का द्वार
बन्दी हैं अधिकार
सोई है सरकार
जागे हैं मक्कार
नालों का संगम
गंगा है बेदम
बढ़ता प्रदूषण
नारि का शोषण
शिक्षा का जनाजा
भिक्षा का खजाना
बस्ता है भारी
ढोना लाचारी
मानवाधिकार
कोई नही सुनता पुकार

13 टिप्‍पणियां:

  1. मानवाधिकार
    कोई नही सुनता पुकार

    बहुत सटीक चित्रण किया है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सूपरररररररररररररररररररररररररररर

    उत्तर देंहटाएं
  3. सटीक चित्रण =>मानवाधिकर =अन्याय ,अविचार का विस्तार

    उत्तर देंहटाएं
  4. अलग मिजाज़ की बंदिश व्यंग्य प्रधान .

    जाने पर प्रतिबऩ्ध/नारी ,नारीत्व

    उत्तर देंहटाएं
  5. कोई नहीं सुनता पुकार ,आयोग है राजनीति का शिकार ................अच्छा चित्रण !!

    उत्तर देंहटाएं
  6. जब मानवों को अपने अधिकारों के लिये लड़ना पड़ता है तो औरों की क्या बिसात।

    उत्तर देंहटाएं
  7. इतना कुछ होते हुए भी देश चल रहा है ..कमाल है..

    उत्तर देंहटाएं
  8. सही कहा ....ज़ोर से चिल्लाने पर भी अब कोई नहीं सुनता

    उत्तर देंहटाएं

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