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मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

"रिश्ते-नाते प्यार के" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

ढंग निराले होते जग में,  मिले जुले परिवार के।
देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।।

चमन एक हो किन्तु वहाँ पर, रंग-विरंगे फूल खिलें,
मधु से मिश्रित वाणी बोलें, इक दूजे से लोग मिलें,
ग्रीष्म-शीत-बरसात सुनाये, नगमें सुखद बहार के।
देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।।

पंचम सुर में गाये कोयल, कलिका खुश होकर चहके,
नाती-पोतों की खुशबू से, घर की फुलवारी महके,
माटी के कण-कण में गूँजें, अभिनव राग सितार के।
देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।।

नग से भू तक, कलकल करती, सरिताएँ बहती जायें,
शस्यश्यामला अपनी धरती, अन्न हमेशा उपजायें,
मिल-जुलकर सब पर्व मनायें, थाल सजें उपहार के।
देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।।

गुरूकुल हों विद्या के आलय, बिके न ज्ञान दुकानों में,
नहीं कैद हों बदन हमारे, भड़कीले परिधानों में,
चाटुकार-मक्कार बनें ना, जनसेवक सरकार के।
देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।।

बरसें बादल-हरियाली हो, बुझे धरा की प्यास यहाँ,
चरागाह में गैया-भैंसें, चरें पेटभर घास जहाँ,
झूम-झूमकर सावन लाये, झोंके मस्त बयार के।
देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।।

18 टिप्‍पणियां:

  1. सुख अलग ही देते हैं, रिश्ते-नाते प्यार ।
    जीवन को चल रखे सदैव, अपनत्व की बौछार ।।

    आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (19-12-12) के चर्चा मंच पर भी है | अवश्य पधारें |सूचनार्थ |

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर रचना ,आभार :
    नई पोस्ट -केंद्रीय विद्यालय -स्वर्ण जयंती

    उत्तर देंहटाएं
  3. चमन एक हो किन्तु वहाँ पर, रंग-विरंगे फूल खिलें,
    मधु से मिश्रित वाणी बोलें, इक दूजे से लोग मिलें,
    ग्रीष्म-शीत-बरसात सुनाये, नगमें सुखद बहार के।
    देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।। बहुत सुन्दर रचना ,आभार :

    उत्तर देंहटाएं
  4. ढंग निराले होते जग में, मिले जुले परिवार के।
    देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।

    बहुत सुन्दर !

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही सार्थक उद्घोष किया है, सुन्दर रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  6. देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।।......sahi kahe....

    उत्तर देंहटाएं
  7. बेहतरीन,बहुत ही सार्थक सुन्दर रचना।

    recent post: वजूद,

    उत्तर देंहटाएं
  8. सार्थक सुन्दर रचना।..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुन्दर,उम्दा प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  10. रिश्तों की महत्ता को शब्दों के सांचे में ढाल कर बड़ी ख़ूबसूरती से वर्णन किया है |

    टिप्स हिंदी में की नयी पोस्ट : गूगल वेब फॉण्ट का प्रयोग अपने ब्लॉग पर कैसे करें ?

    उत्तर देंहटाएं
  11. रचना को कोई एक शेर पसंद होता तो कॉपी करके कहता की ये पसंद आया.लेकिन इस रचना के हर हर शेर अपने अन्दर एक अपनापन लिए इतने सुन्दर बन पड़े हैं की ये दिल से कह सकता हूँ की सभी पसंद आये.

    उत्तर देंहटाएं

  12. वाह शास्त्री जी एक ही रचना में जोश खरोश भी सौन्दर्य और कोमलता भी भाषिक कोमलता भी .

    बरसें बादल-हरियाली हो, बुझे धरा की प्यास यहाँ,
    चरागाह में गैया-भैंसें, चरें पेटभर घास जहाँ,
    झूम-झूमकर सावन लाये, झोंके मस्त बयार के।
    देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।।

    उत्तर देंहटाएं

  13. वाह शास्त्री जी एक ही रचना में जोश खरोश भी सौन्दर्य और कोमलता भी भाषिक कोमलता भी .

    बरसें बादल-हरियाली हो, बुझे धरा की प्यास यहाँ,
    चरागाह में गैया-भैंसें, चरें पेटभर घास जहाँ,
    झूम-झूमकर सावन लाये, झोंके मस्त बयार के।
    देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।।

    एक बात और शास्त्री जी इस रचना को -इस धुन में गाके देखी मीटर पूरा आता है -

    आओ बच्चो तुम्हें दिखाएँ झांकी हिन्दुस्तान की ,इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की .

    उत्तर देंहटाएं

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