"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शनिवार, 22 दिसंबर 2012

"जीवन जीना है दूभर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

छिपा क्षितिज में सूरज राजा,
ओढ़ कुहासे की चादर।
सरदी से जग ठुठुर रहा है,
बदन काँपता थर-थर-थर।।
कुदरत के हैं अजब नजारे,
शैल ढके हैं हिम से सारे,
दुबके हुए नीड़ में पंछी,
हवा चल रही सर-सर-सर।
सरदी से जग ठुठुर रहा है,
बदन काँपता थर-थर-थर।।

कोट पहन और ओढ़ रजाई,
दादा जी ने आग जलाई,
मिल जाती गर्मी अलाव से,
लकड़ी पाना है दूभर।
सरदी से जग ठुठुर रहा है,
बदन काँपता थर-थर-थर।।

टॉम-फिरंगी प्यारे-प्यारे,
सिकुड़े बैठे हैं बेचारे,
तन को गर्मी पहुँचाने को,
भाग रहे हैं इधर-उधर।
सरदी से जग ठुठुर रहा है,
बदन काँपता थर-थर-थर।।

मिलते नहीं कहीं अब कण्डे,
बिना गैस के चूल्हे ठण्डे,
महँगाई की मार पड़ी है,
जीवन जीना है दूभर।
सरदी से जग ठुठुर रहा है,
बदन काँपता थर-थर-थर।।

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी कविता है.लगता है आप शिमला या मसूरी की यात्रा पर हैं.मजा लीजिये ठन्ड का .

    उत्तर देंहटाएं
  2. दूसरे फ़ोटो वाला पक्षी आजकल दुर्लभ होता जा रहा है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. ठण्ड इस वक्त अपने पूरे शबाब पर है :))

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत खूब,,,,इस भीषण ठण्ड में अलाव का मजा लीजिये,,,,

    recent post: समाधान समस्याओं का,

    उत्तर देंहटाएं
  5. यहां भी खूब ठंड है....कड़ाके वाली....

    उत्तर देंहटाएं
  6. बड़े और बच्चों सभी के लिए लाजवाब कविता।
    ठण्ड का मज़ा तो आपलोगों (उत्तराखंड वासियों) को ही आ रहा होगा.
    आपका स्वागत है---
    www.jeevanmag.tk

    उत्तर देंहटाएं

  7. बच्चन से हम बोलत नाहीं ,ज्वान हमारे भैया ,
    बुड्ढन को हम छोड़त नाहीं ओढ़ ले चाहे रजैया !

    उत्तर देंहटाएं
  8. चित्रों को पूर्णतः परिभाषित करते हुए सर्दी का खूबसूरत वर्णन किया है आपने मजा लीजिये सर्दी का

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails