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सोमवार, 24 दिसंबर 2012

"उच्चारण की सबसे लोकप्रिय प्रविष्टि"

मित्रों!
दिसम्बर का अन्त होने वाला है,
एक सप्ताह के बाद
नयासाल आने वाला है।
आज मैं 
बुधवार, 17 जून 2009 
को पोस्ट की गई 
उच्चारण की सबसे लोकप्रिय प्रविष्टि
(जो अब तक 8455 बार पढ़ी जा चुकी है)
को प्रस्तुत कर रहा हूँ!

-0-0-0-
‘‘वर्षा ऋतु’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल।
श्वेत-श्याम से नजर आ रहे मेघों के दल।

कही छाँव है कहीं घूप है,
इन्द्रधनुष कितना अनूप है, 

मनभावन रंग-रूप बदलता जाता पल-पल। 
आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल।।

मम्मी भीगी , मुन्नी भीगी,
दीदी जी की चुन्नी भीगी,
मोटी बून्दें बरसाती, निर्मल-पावन जल।
आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल।।

हरी-हरी उग गई घास है,
धरती की बुझ गई प्यास है,
नदियाँ-नाले नाद सुनाते जाते कल-कल।
आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल।।

बिजली नभ में चमक रही है,
अपनी धुन में दमक रही है,

वर्षा ऋतु में कृषक चलाते खेतो में हल।

आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार 25/12/12 को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका स्वागत है ।
    खूबसूरत चित्रों के साथ खूबसूरत लेखन बधाई आपको Happy christmas

    उत्तर देंहटाएं
  2. खूबसूरत सुंदर चित्रमय लेखन के लिए बधाई,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  3. सचित्र चित्रण -बहुत सुन्दर
    नई पोस्ट : "सास भी कभी बहू थी "

    उत्तर देंहटाएं
  4. घनन घनन घन नभ छाये हैं..
    बहुत ही सुन्दर कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सार्थक प्रस्तुति सुन्दर चित्रण ****^^^^^****कही छाँव है कहीं घूप है,
    इन्द्रधनुष कितना अनूप है,
    मनभावन रंग-रूप बदलता जाता पल-पल।
    आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. अत्यंत गरिमामय और सार्थक रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  7. चित्रों ने अभिव्यक्‍ति में चार चाँद लगा दिए ! अति सुंदर !

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाकयी सुन्दर कविता, लोकप्रिय तो होना ही था।

    उत्तर देंहटाएं

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