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शनिवार, 1 दिसंबर 2012

"चाटुकार सरदार हो गये" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


देशभक्त हो गये किनारे, चाटुकार सरदार हो गये।
नौका को भटकाने वाले, ही अब खेवनहार हो गये।।

मुरझाये हैं सुमन सलोने, गुलशन भी है सूखा-सूखा,
बीज-खाद-पानी खा डाला, फिर भी तो है माली भूखा,
भीनीमहक कहाँ से आये, पैदा खरपतवार हो गये।
नौका को भटकाने वाले, ही अब खेवनहार हो गये।।

शिक्षा की खुल गयी दुकानें, गुरू हो गये हैं व्यापारी,
बिना ज्ञान के नयी नस्ल में, बढ़ती जाती है बेकारी,
ऋषियों की सन्तानों के अब, गायब सब किरदार हो गये।
नौका को भटकाने वाले, ही अब खेवनहार हो गये।।

चारे की क्या बात कहें अब, लोहा-लक्कड़-ईंट पचाते,
सेवा का व्रत ले जनसेवक, रिश्वत और दलाली खाते,
जनता के पैसे से इनके, तगड़े कारोबार हो गये।
नौका को भटकाने वाले, ही अब खेवनहार हो गये।।

बनकर बगुलाभगत, ताल की मीनों को ये घूँट रहे है,
हाथ-कमल, बाइस्किल-हाथी, सारे ही तो लूट रहे हैं,
वोटों की भिक्षा पा करके, भिक्षुक जी सरकार हो गये।
नौका को भटकाने वाले, ही अब खेवनहार हो गये।।

17 टिप्‍पणियां:

  1. आज की तस्वीर करती अच्छी रचना है शास्त्री जी ! इन चाटुकार सरदारों ने देश का बेड़ा गरक किया, भगवान् इनका बेड़ा गरक करे !

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. क्षमा चाहता हूँ , ये गूगल वाले ने भी ट्रान्सलिट्रेशन का बेड़ा गरक कर दिया ऊपर की टिपण्णी में " बयान" शब्द मिसिंग है , कृपया उसे आज की तस्वीर बयान करती पढ़े !

      हटाएं
  2. शिक्षा की खुल गयी दुकानें, गुरू हो गये हैं व्यापारी,
    बिना ज्ञान के नयी नस्ल में, बढ़ती जाती है बेकारी,
    ऋषियों की सन्तानों के अब, गायब सब किरदार हो गये।
    नौका को भटकाने वाले, ही अब खेवनहार हो गये।।
    bilkul sahi kaha hai aapne.

    उत्तर देंहटाएं
  3. सटीक प्रहार |
    बधाई गुरु जी ||

    उत्तर देंहटाएं
  4. देशभक्त हो गये किनारे, चाटुकार सरदार हो गये।

    इसी पंक्ति ने सब कुछ कह दिया…………शानदार प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  5. व्यंग बहुत धारदार है वर्तमान परिप्रेक्ष्य में
    बहुत बढ़िया

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत बढ़िया तंज किया है भवानी प्रसाद मिश्र की ये पंक्तियाँ याद आ गईं -

    अधिक नहीं सिर्फ चार कौवे थे ,

    कभी कभी ऐसा जादू हो जाता है ,

    ये सब कौवे चार बड़े सरदार हो गए ,

    इनके साथी चील ,गिद्ध, और बाज़ हो गए .

    उत्तर देंहटाएं
  7. शिक्षा की खुल गयी दुकानें, गुरू हो गये हैं व्यापारी,
    बिना ज्ञान के नयी नस्ल में, बढ़ती जाती है बेकारी,

    bahut sahi kaha hai aapne .aabhar

    उत्तर देंहटाएं
  8. भ्रष्टाचार मिटाने वाले आन्दोलन की बैंड बज गयी।
    अन्ना जी की टोपी अब केजरीवाल के शीश सज गयी।
    लगी जाँच की आँच तेज तो रामदेव बेजार हो गये।
    नौका को भटकाने वाले, ही अब खेवनहार हो गये॥

    उत्तर देंहटाएं
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    उत्तर देंहटाएं
  10. अधिक नहीं सिर्फ चार कौवे थे ,

    कभी कभी ऐसा जादू हो जाता है .

    ये सब कौवे चार बड़े सरदार हो गए ,

    इनके दुश्मन चील गिद्ध और बाज़ हो गए .

    शास्त्री जी रात को भी टिपण्णी की थी इस पोस्ट पर फेस बुक पर भी आपके ब्लॉग पर भी .सौतिया स्पेम खा गया .बढिया बहुत बढ़िया बंदिश है यह आपकी बेहतरीन तंज करती है व्यवस्था गत विद्रूप पर

    उत्तर देंहटाएं
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  12. बहुत दमदार चित्रण, पता नहीं क्या से क्या है गये।

    उत्तर देंहटाएं

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