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शनिवार, 29 दिसंबर 2012

"देश की बेटी दामिनी" (भावभीनी श्रद्धांजलि!)

देश की बेटी दामिनी
को 
भावभीनी श्रद्धांजलि!
ज़ुल्म की सलीब पे, वार गई ज़िन्दग़ी 
लड़ते-लड़ते मौत से, हार गई ज़िन्दग़ी 

आदमी के देश में, मर गया ज़मीर है,
लड़ते-लड़ते मौत से, हार गई ज़िन्दग़ी 

सो गई स्वयं मगर, देश को जगा गई 
लड़ते-लड़ते मौत से, हार गई ज़िन्दग़ी 

दामिनी के वास्ते, दुआ न काम आ सकीं 
लड़ते-लड़ते मौत से, हार गई ज़िन्दग़ी 

21 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल ठीक कहा आपने .
    नई पोस्ट; निर्भय (दामिनी )को श्रद्धांजलि

    उत्तर देंहटाएं
  2. सो गई स्वयं मगर, देश को जगा गई
    लड़ते-लड़ते मौत से, हार गई ज़िन्दग़ी

    आह ही निकलेगी इस कहानी के यूं खत्म होने पर

    उत्तर देंहटाएं
  3. आज सुबह पहली खबर यही सुनी। तब से ही दिमाग बड़ा अफसेट हैं। बहुत गलत हुआ इस लड़की दर्द सारा देश महसूस कर रहा है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेटी दामिनी

    हम तुम्हें मरने न देंगे
    जब तलक जिंदा कलम है

    उत्तर देंहटाएं
  6. देश की बेटी दामिनी को
    भावभीनी श्रद्धांजलि!...

    उत्तर देंहटाएं
  7. जाते-जाते देश को जगा गई....

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत गलत हुआ**** सो गई स्वयं मगर, देश को जगा गई
    लड़ते-लड़ते मौत से, हार गई ज़िन्दग़ी

    दामिनी के वास्ते, दुआ न काम आ सकीं
    लड़ते-लड़ते मौत से, हार गई ज़िन्दग़ी ****भावभीनी श्रद्धांजलि

    उत्तर देंहटाएं
  9. शानदार अभिव्यक्ति,
    जारी रहिये,
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  10. "सो गई स्वयं मगर, देश को जगा गई"
    स्थायी हो यह जागृति! विनम्र श्रद्धांजलि!

    उत्तर देंहटाएं
  11. विनम्र श्रद्धांजलि! सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

    उत्तर देंहटाएं
  12. दामिनी के इस बलिदान में ही उसकी जीत छिपी है ! उसकी घायल देह मौत से ज़रूर हार गयी लेकिन उसकी आत्मा करोड़ों नारियों की प्रेरणा बन कर उनकी संकल्प शक्ति में सदैव जीवित रहेगी ! दामिनी को हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि ! रचना बहुत मार्मिक है ! आभार आपका !

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  13. आपकी सद्य टिप्पणियों का शुक्रिया .आदरणीय भाव रखेंगे सभी महिलामात्र के प्रति यही इस बरस का शुभ सामूहिक संकल्प होना चाहिए .आभार .

    उत्तर देंहटाएं
  14. दामिनी को भावभीनी
    श्रद्धांजलि!

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  15. क्या करे सिस्टम ही ऐँसा हैँ एक काम कर सकते हो और हैँ अंत मेँ अफसोस ।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. ki मारने वाला जिँदा हैँ और दामिनी ने दम तोड दिया उन हरामखोर को साँस लेने का हक नही कब तक बचेँगा उसकी साँसे जिसपर उसका हक नही ।

      हटाएं
  16. बहुत भारी मन से विनम्र श्रद्धांजलि !

    उत्तर देंहटाएं
  17. बहुत सुन्दर और मार्मिक अभिव्यक्ति.

    उत्तर देंहटाएं
  18. जीवन जीना सिखलायेगा यह बलिदान..

    उत्तर देंहटाएं

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