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रविवार, 16 दिसंबर 2012

"मिलन की आस" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

"मिलन की आस"
प्रियतम जब तुम आओगे तो,
संग बहारें लाओगे।
स्नेहिल रस बरसाओगे और
रंग फुहारें लाओगे।।

तुमको पाकर मन के उपवन,
बाग-बाग हो जायेंगे,
वीराने गुलशन में फिर से,
कली-सुमन मुस्कायेंगे,
जीवनरूपी बगिया में तुम,
ढंग निराले लाओगे।
स्नेहिल रस बरसाओगे और
रंग फुहारें लाओगे।।

अमराई में कोयल फिर से,
कुहुँक-कुहुँक कर गायेगी,
मुर्झाई अमियों में फिर से,
मस्त जवानी छायेगी,
अमलतास के पेड़ों पर,
पचरंगी फूल खिलाओगे।
स्नेहिल रस बरसाओगे और
रंग फुहारें लाओगे।।

आशा है आकर तुम मेरे,
कानों में रस घोलोगे,
सदियों का तुम मौन तोड़कर,
मीठे स्वर में बोलोगे,
अपनी साँसो के सम्बल से,
मुझको तुम सहलाओगे।
स्नेहिल रस बरसाओगे और
रंग फुहारें लाओगे।।

18 टिप्‍पणियां:

  1. प्यार से प्यारी अभिव्यक्ति

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  2. प्रियतम तुम्हरे आवन में..,
    अइन संग बहारे सावन में..,
    सनेहित रस बर बरखा धर..,
    लइन रंग फुहारें सावन में.....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 17-12-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1096 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर और प्यारी रचना बहुत उम्दा
    सदियों का तुम मौन तोड़कर,
    मीठे स्वर में बोलोगे,
    अपनी साँसो के सम्बल से,
    मुझको तुम सहलाओगे।
    स्नेहिल रस बरसाओगे और
    रंग फुहारें लाओगे।।

    उत्तर देंहटाएं
  5. प्यार भरी सुन्दर प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत उम्दा .प्यार भरी सुन्दर प्रस्तुति. बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत बढ़िया प्रेम गीत .प्रकृति में प्रेम के रंग बोता हुआ . तृप्ति से संसिक्त .

    उत्तर देंहटाएं
  8. kaaga sab tan khaaiyo mera chun chun khaaiyo maas....
    do naina mat khaaiyo mohe piya milan ki aas...

    उत्तर देंहटाएं
  9. प्यार भरी सुन्दर प्रस्तुति। SAR G

    उत्तर देंहटाएं

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