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सोमवार, 14 अक्तूबर 2013

"रावण को जलाओ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


मीत का साथ निभाओ तो कोई बात बने।
गीत में साज बजाओ तो कोई बात बने।।

एक दिन मौज मनाने से क्या भला होगा?
रोज दीवाली मनाओ तो कोई बात बने।

इन बनावट के उसूलों में धरा ही क्या है?
प्रीत हर दिल में जगाओ तो कोई बात बने।

क्यों खुदा कैद किया दैर-ओ-हरम में नादां,
रब को सीने में सजाओ तो कोई बात बने।

सिर्फ पुतलों के जलाने से फायदा क्या है?
दिल के रावण को जलाओ तो कोई बात बने।

रूप की धूप रहेगी न सलामत नादां,
 इश्क का ध्यान लगाओ तो कोई बात बने।

8 टिप्‍पणियां:

  1. सिर्फ पुतलों के जलाने से फायदा क्या है?
    दिल के रावण को जलाओ तो कोई बात बने।

    वाह ! बहुत सुंदर गजल !
    विजयादशमी की शुभकामनाए...!

    RECENT POST : - एक जबाब माँगा था.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर .
    विजयादशमी की शुभकामनाएँ .

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस पोस्ट की चर्चा, मंगलवार, दिनांक :-15/10/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -25 पर.
    आप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर !
    जरूर बनेगी जब बनेगी बात !

    उत्तर देंहटाएं
  5. सिर्फ पुतलों के जलाने से फायदा क्या है?
    दिल के रावण को जलाओ तो कोई बात बने।
    बहुत सुन्दर कहा आपने !
    अभी अभी महिषासुर बध (भाग -१ )!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत खूब ,बहुत खूब ,बहुत खूब।


    सिर्फ पुतलों के जलाने से फायदा क्या है?
    दिल के रावण को जलाओ तो कोई बात बने।

    उत्तर देंहटाएं

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