"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

सोमवार, 28 अक्तूबर 2013

"दोहे-उलझे हुए सवाल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

बेमौसम की आँधियाँ, दिखा रही औकात।
कैसे डाली पर टिकें, मुरझाये से पात।।
--
झूम-झूम लहरा रहे, हरे-भरे सब पात।
संग-साथियों से करें, अपने मन की बात।।
--
बचपन होता है सरल, गरल बुढ़ापा होय।
मीठी गोली छोड़ कर, अब खा रहे गिलोय।।
--
आगे ही कुछ केश हैं, पीछे गंजी चाँद।
समयचक्र के केश को, आगे जाकर बाँध।।
--
जीवन एक पहाड़ है, कहीं चढ़ाई-ढाल।
परेशान करते बहुत, उलझे हुए सवाल।।

12 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन एक पहाड़ है, कहीं चढ़ाई-ढाल।
    परेशान करते बहुत, उलझे हुए सवाल।।
    बहुत सुन्दर .
    नई पोस्ट : भारतीय संस्कृति और लक्ष्मी पूजन

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस पोस्ट की चर्चा, मंगलवार, दिनांक :-29/10/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -36 पर.
    आप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा

    उत्तर देंहटाएं
  3. जीवन एक पहाड़ है, कहीं चढ़ाई-ढाल।
    परेशान करते बहुत, उलझे हुए सवाल।।uttam dohe

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर प्रस्तुति है गुरुवर-
    आभार आपका-

    उत्तर देंहटाएं
  5. जीवन एक पहाड़ है, कहीं चढ़ाई-ढाल।
    परेशान करते बहुत, उलझे हुए सवाल।।

    भावपूर्ण सुंदर दोहे ,,, आभार ...

    RECENT POST -: तुलसी बिन सून लगे अंगना

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २९ /१० /१३ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका वहाँ हार्दिक स्वागत है ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बेमौसम की आँधियाँ, दिखा रही औकात।
    कैसे डाली पर टिकें, मुरझाये से पात।।
    मोदी के आगे नहीं इनकी कुछ औकात ,
    कहते इनको "आई-एम्" खूब लगाते घात।
    लिस्ट लिए था घूमता मंद मति कल रात ,
    बित्ता भर का कद नहीं ,पल पल पे उत्पात।

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति है दोहों की -

    जीवन एक पहाड़ है, कहीं चढ़ाई-ढाल।
    परेशान करते बहुत, उलझे हुए सवाल।।

    उत्तर देंहटाएं
  8. जीवन एक पहाड़ है, कहीं चढ़ाई-ढाल।
    परेशान करते बहुत, उलझे हुए सवाल।।
    जीवन पर बहुत सुन्दर दोहे !
    नई पोस्ट सपना और मैं (नायिका )

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails