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बुधवार, 16 अक्तूबर 2013

"कैसे मुलाकात होती" डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


न मजमून लिखतेन कुछ बात होती
बताओ तो कैसे मुलाकात होती

अगर दोस्ती है तो शिकवे भी होंगे
न शक कोई होतान कुछ घात होती

अगर तुम न प्यादे को आगे बढ़ाते
न शह कोई पड़तीन फिर मात होती

दिखाता न सूरत अगर चाँद अपनी
न फिर ईद होती न सौगात होती

अगर तुम न छुप-छुपके मिलते चमन में
सुहानी न फिर चाँदनी रात होती

अगर "रूप" अपना दिखाते न दिलवर
न बिजली चमकती न बरसात होती

9 टिप्‍पणियां:

  1. अगर "रूप" अपना दिखाते न दिलवर
    न बिजली चमकती न बरसात होती------gajab ki baat kahi hai

    उत्तर देंहटाएं
  2. अगर तुम न छुप-छुपके मिलते चमन में
    सुहानी न फिर चाँदनी रात होती..वाह्क्या बात कह दी..बहुत बढिया

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा 17-10-2013 को
    चर्चा मंच
    पर है ।
    कृपया पधारें
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ,भावपूर्ण

    उत्तर देंहटाएं
  5. अगर तुम न प्यादे को आगे बढ़ाते
    न शह कोई पड़ती, न फिर मात होती

    छा गए गुरु देव।

    उत्तर देंहटाएं

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