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बुधवार, 1 जनवरी 2014

"सिर्फ कलेण्डर ही तो बदला" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गुजर गया है साल पुराना।
गाओ फिर से नया तराना।।

सब कुछ तो पहले जैसा है,
लक्ष्य आज भी तो पैसा है,
सिर्फ कलेण्डर ही तो बदला,
वही ठौर है, वही ठिकाना।

नित्य नये अनुभव होते हैं,
कुछ हँसते हैं, कुछ रोते हैं,
जीवन तो बस एक सफर है,
सबको पड़ता आना-जाना।

पीना पड़ा यहाँ गरल है,
शंकर बनना नहीं सरल है,
कैसे महादेव बन जायें?
मुश्किल गंगा धार बहाना।

आपाधापी, भाग-दौड़ है,
गुणा-भाग है और होड़ है,
इक आता है, इक जाता है,
जग है एक मुसाफिरखाना।

लोग मील के पत्थर जैसे,
अपनी मंजिल पायें कैसे?
औरों को पथ बतलाते हैं,
ये क्या जानें कदम बढ़ाना।

15 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बहुत सुंदर !
    नव वर्ष मंगलमय हो !

    उत्तर देंहटाएं

  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 02-01-2014 को चर्चा मंच पर दिया गया है
    आभार 

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर प्रस्तुति...!
    नव वर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाए
    RECENT POST -: नये साल का पहला दिन.

    उत्तर देंहटाएं
  4. ना मौसम बदलता है, ना बसन्‍त आता है बस कलेण्‍डर बदलने का ही नाम है यह अग्रेजी साल। बहुत अच्‍छी कविता के लिए बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  5. धरती नहीं बदली न बदली मनुष्य की प्रकृति
    केवल कलेंडर बदला जो मानव की है कृति !
    नया वर्ष २०१४ मंगलमय हो |सुख ,शांति ,स्वास्थ्यकर हो |कल्याणकारी हो |
    नई पोस्ट नया वर्ष !
    नई पोस्ट मिशन मून

    उत्तर देंहटाएं
  6. अंग्रेजी नव वर्ष सिर्फ कैलेण्डर बदलने जैसा ही ...
    फिर भी इस नव वर्ष की बहुत शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपकी इस ब्लॉग-प्रस्तुति को हिंदी ब्लॉगजगत की सर्वश्रेष्ठ कड़ियाँ (1 जनवरी, 2014) में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,,सादर …. आभार।।

    कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

    उत्तर देंहटाएं
  8. बढ़िया ...नये साल की शुभकामनाओं के साथ ...

    उत्तर देंहटाएं
  9. पीना पड़ा यहाँ गरल है,
    शंकर बनना नहीं सरल है,
    कैसे महादेव बन जायें?
    मुश्किल गंगा धार बहाना।

    अति सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुन्दर प्रस्तुति-
    शुभकामनायें आदरणीय

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर.
    नव वर्ष की शुभकामनाएँ !!

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत बढ़िया कहा आपने!
    अपना भी कुछ ऐसा मानना है:

    जैसे हो उस हाल मुबारक,
    टेढ़ी-मेढ़ी चाल मुबारक,
    वो ही पुराना माल मुबारक,
    फिर भी नया साल मुबारक???

    उत्तर देंहटाएं
  13. अति सुन्दर .... सदर नमन
    सब कुछ तो पहले जैसा है,
    लक्ष्य आज भी तो पैसा है,
    सिर्फ कलेण्डर ही तो बदला,
    वही ठौर है, वही ठिकाना।

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। । नव वर्ष की हार्दिक बधाई।

    उत्तर देंहटाएं

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