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बुधवार, 29 जनवरी 2014

"कैसे नवअंकुर उपजाऊँ..?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

पेड़ पुराना हुआ नीम का,
कैसे इसमें यौवन लाऊँ?
सूखी शाखाओं में कैसे
कैसे नवअंकुर उपजाऊँ?

पात हो गये अब तो पीले,
अंग हो गये सारे ठीले,
तेज हवाओं से झोंखो से,
कैसे निज अस्तित्व बचाऊँ

पोर-पोर में पीर समायी,
हिलना-डुलना अब दुखदायी,
वासन्ती इस मौसम में अब,
कैसे सुखद समीर बहाऊँ?

लोग तने को काट रहे हैं
अंग-अंग को छाँ रहे हैं,
आदम-हव्वा के ज़ुल्मों से,
कैसे अब छुटकारा पाऊँ?

पहले था ये बदन सलोना
“रूप” हो गया अब तो बौना,
बोलो अब कैसे बौराऊँ?
किस-किस को अब व्यथा सुनाऊँ??

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 30-01-2014 को चर्चा मंच पर दिया गया है
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  2. भावमय करते शब्‍दों का संगम
    मन को छूती पोस्‍ट

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक जीवित पेड़ के कटने के दर्द की गहन अभिव्यक्ति...

    उत्तर देंहटाएं

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