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गुरुवार, 30 जनवरी 2014

"मधुमास आ गया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

टेसू के पेड़ पर अब,
कलियाँ दहक रहीं हैं।
मधुमास आ गया है,
चिड़ियाँ चहक रहीं हैं।
 
सरसों के खेत में भी,
पीले सुमन खिले हैं।
आने लगे चमन में,
भँवरों के काफिले हैं।
मादक सुगन्ध से अब,
गलियाँ महक रहीं है।
 
सेमल की शाख पर भी,
फूलों में लालियाँ हैं।
गेहूँ ने धार ली अब,
 गहनों की बालियाँ हैं।
मस्ती में झूमकर ये,
कैसे लहक रही हैं।
 
जोड़े नये नवेले,
अनुराग से भरे हैं।
मौसम बसन्त का है,
मन फाग से भरे हैं।
पथ हैं वही पुराने,
मंजिल बहक रही हैं।
 
तिनके बटोरने में,
तल्लीन हैं परिन्दे।
खुशियों को रौंदते हैं,
लेकिन कुटिल दरिन्दे।
आहत बहुत चिरैया,
लेकिन चहक रही हैं। 

16 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. namaste shashtri ji ,
      bahut sundar get hai , hardik badhai padhkar anad aa gaya sach me madhumaas aa gaya

      हटाएं
  2. सुंदर...अति सुंदर चित्रण...

    उत्तर देंहटाएं
  3. टेसू के पेड़ पर अब,
    कलियाँ दहक रहीं हैं।
    मधुमास आ गया है,
    चिड़ियाँ चहक रहीं हैं।

    बहुत सुन्दर सांगीतिक पंक्तियाँ हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  4. टेसू के पेड़ पर अब,
    कलियाँ दहक रहीं हैं।
    मधुमास आ गया है,
    चिड़ियाँ चहक रहीं हैं।

    बहुत सुन्दर सांगीतिक पंक्तियाँ हैं।

    आहत बहुत चिरैया लेकिन चहक रही है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. हर एक शब्द बहुत सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बासंती आगमन का बहुत सुन्दर मधुमय चित्रण....!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. कविगण बहक रहे हैं, मधुमास आ गया है. सुंदर रचना .

    उत्तर देंहटाएं
  8. प्रकृति ने परिवर्तन के हरकारे भेज दिये हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  9. वसंत के स्वागत में बहुत सुंदर रचना लिपिबद्ध की है ! हर दृश्य आँखों के आगे साकार हो गया !

    उत्तर देंहटाएं

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