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शुक्रवार, 10 जनवरी 2014

"जीवन तो बहुत जरा सा है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

जीवन इक खेल तमाशा है।
जीवन जीने की आशा है।।

जिसने जग में जीवन पाया,
आया अदभुत् सा गान लिए।
मुस्कान लिए अरमान लिए,
जग में जीने की शान लिए।
इस बालक से जब यह पूछा-
बतलाओ तो जीवन क्या है?
बोला दुनिया परिभाषा है,
सारा जीवन एक भाषा है।
जीवन इक खेल तमाशा है,
जीवन जीने की आशा है।।

पोथी जग की पढ़ते-पढ़ते,
अपने पथ पर बढ़ते-बढ़ते।
इक नीड़ बसाया जब उसने,
संसार सजाया जब उसने।
तब मैंने उससे यह पूछा-
बतलाओ तो जीवन क्या है?
वह बोला जीवन आशा है,
जीवन तो मधुर सुधा सा है।
जीवन इक खेल तमाशा है,
जीवन जीने की आशा है।।

कुछ श्वेत-श्याम केशों वाले,
अनुभव के परिवेशों वाले।
अलमस्त पौढ़ और फलवाले,
जीवन बगिया के रखवाले।
बूढ़े बरगद से यह पूछा-
बतलाओ तो जीवन क्या है?
बोला जीवन अभिलाषा है,
जीवन तो एक पिपासा है।
जीवन इक खेल तमाशा है,
जीवन जीने की आशा है।।

जब आनन दन्त-विहीन हुआ,
तन सूख गया, बल क्षीण हुआ।
जब पीत बन गयी हरियाली,
मुरझाई जब डाली-डाली।
फिर मैंने उससे यह पूछा-
अब बतलाओ जीवन क्या है?
तब उसने अपना मुँह खोला,
बस धीमे से ही यह बोला।
जीवन तो एक निराशा है,
जीवन तो बहुत जरा सा है।
जीवन इक खेल तमाशा है,
जीवन जीने की आशा है।।

14 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. क्या बात है-
      अब बोलो क्या है जीवन-
      जीवन तो एक निराशा है-
      अति सुन्दर-

      हटाएं
  2. जीवन इक खेल तमाशा है,
    जीवन जीने की आशा है।।
    बहुत सुंदर.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (11-1-2014) "ठीक नहीं" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1489" पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

    उत्तर देंहटाएं
  4. माननीय रूप चन्द्र शास्त्री मयंक जी !
    आपने तो बहुत ही संगीतमय शब्दों में जीवन के सभी रंग व्यक्त कर दिए-----इस सुंदर काव्य रचना को पढ़ने के बाद अब तो बस यही भाव मन में उठ रहा है---
    जीवन का सार समझ आये
    बस अब तो यही अभिलाषा है!
    रेकटर कथूरिया (पंजाब स्क्रीन) लुधियाना (पंजाब)

    उत्तर देंहटाएं
  5. बतलाओ तो जीवन क्या है?
    वह बोला जीवन आशा है,
    जीवन तो मधुर सुधा सा है।
    जीवन इक खेल तमाशा है,
    जीवन जीने की आशा है।।

    बहुत सुन्दर फलसफा -

    जीवन कर्मों का लेखा है
    जो बोयेगा सो काटेगा

    उत्तर देंहटाएं
  6. सार्थक और सुंदर रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई ---

    उत्तर देंहटाएं
  7. मित्र शुभ सर्वकाल !

    अच्छी गम्भीर रचना है !

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत खूब

    पर जीवन में एक उम्मीद की किरण अभी बाकी है

    उत्तर देंहटाएं
  9. कल 12/01/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं

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