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शनिवार, 1 अगस्त 2015

"सच के साथ हमेशा जाएँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


सच के साथ हमेशा जाएँ।
आओ अपना धर्म निभाएँ।।

स्वाभिमान को कभी न त्यागें,
लालच के पीछे ना भागें,
जग को उसका कर्म बताएँ।
आओ अपना धर्म निभाएँ।१।

सोच हमेशा रखना व्यापक,
बन कर दिखलाना अध्यापक,
विषयवस्तु सबको समझाएँ।
आओ अपना धर्म निभाएँ।२।

जल में कुटिल पंक फैला है,
गंगा का आँचल मैला है,
फिर से निर्मल धार बनाएँ।
आओ अपना धर्म निभाएँ।३।

कुदरत की लीला अद्भुत है,
जीवन थोड़ा काम बहुत है,
पाप नहीं कुछ पुण्य कमाएँ।
आओ अपना धर्म निभाएँ।४।

राहू, वक्र-चन्द्र खा जाता,
सरल सदा मंजिल को पाता,
कभी विरल मत पथ अपनाएँ।
आओ अपना धर्म निभाएँ।५।

मन भी होगा तन भी होगा,
सुलभ न ऐसा जीवन होगा,
जाने कब मानुष तन पाएँ।
आओ अपना धर्म निभाएँ।६।

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