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रविवार, 23 अगस्त 2015

दोहे "मन में यही सवाल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


अच्छे दिन कब आयेंगे, मन में यही सवाल।
सस्ता ईंधन हो रहा, लेकिन मँहगी दाल।।
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जमाखोर ही हो रहे, अब तो मालामाल।
मँहगाई की मार से, जनता है बेहाल।।
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लगातार ही बढ़ रहे, खान-पान के दाम।
अब व्यापारी वर्ग पर, कोई नहीं लगाम।।
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तेल कान में डाल कर, सोये ओहदेदार।
लालाओं की ही हमें, लगती है सरकार।।
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डीजल के तो घट रहे, धीरे-धीरे दाम।
फिर भाड़ा कम क्यों नहीं, पूछ रहा है आम।।
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निर्धन के बस का नहीं, जाना अब बाज़ार।
प्याज रुलाती जा रही, जनता है लाचार।।
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बिकती फसल किसान की, दो कौड़ी के दाम।।
मँहगाई के लिए सब, भर लेते गोदाम।।

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