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शनिवार, 8 अगस्त 2015

दोहे "फिर से वन्देमातरम, नक्शे में हो जाय" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

देख रहा करतूत को, होकर मूक जहान।
पाल रहा आतंक को, कैसे पाकिस्तान।।
--
भारत में पकड़े गये, पाकिस्तानी पूत।
राष्ट्रसंघ को चाहिएँ, कितने और सबूत।।
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इतने पर भी बोलता, पाक झूठ पर झूठ।
जब बनता माहौल कुछ, तब ही जाता रूठ।।
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अफजल और कसाब के, आया बाद नवेद।
वो छलनी क्यों बोलती, जिसके तन में छेद।।
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नाम भले ही पाक हो, हरकत हैं नापाक।
बन्दर देकर घुड़कियाँ, जमा रहा है धाक।।
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हमने करके युद्ध को, दिखा दिया आवेश।
भारत के कारण बना, अलग बांगलादेश।।
--
भारतमाता हाथ में, रखती है त्रिशूल।
टकराने की कभी भी, मत करना तुम भूल।।
--
युद्ध हुआ अब यदि कभी, देंगे नाम मिटाय।
फिर से वन्देमातरम, नक्शे में हो जाय।।

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