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मंगलवार, 13 नवंबर 2018

"बालगीत और बालकविता में भेद" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


बालगीत और बालकविता
             बहुत से लोग जानकारी के अभाव में बाल गीत को बाल कविता और बालकविता को बालगीत लिख देते हैं। किन्तु यह विचार नहीं करते कि बालकविता और बालगीत कोई नयी विधा नहीं है। गीत से बालगीत और कविता से बालकविता बना है। अर्थात् बच्चों के लिए लिखा गया पद्य साहित्य। इसके लिए हमें गीत और कविता के बारे में विस्तार से जानना होगा। मैं बिन्दुवार इस विषय पर प्रकाश डालना चाहता हूँ।
     1-  गीत और कविता दोनों में गेयता होती है।
    2-   गीत में अन्तरा होता है जिसमें गीत की प्रारम्भिक पंक्ति अर्थात टेक के अनुसार तुकान्त शब्द होता है।
    3-     गीत को संगीत के रागों में लयबद्ध किया जा सकता है परन्तु कविता को रागों में नहीं बाँधा जा सकता।
    4-     गीत और कविता कलात्मक अभिव्यक्तियाँ हैं जिनमें विशिष्ट भाषा प्रयोग किया जाता है। जबकि गीत एक संगीत रचना है।
     5-     कविता को गाया भी जा सकता है और पाठ के रूप में पढ़ा जाता है। लेकिन गीत का तो अर्थ इसके शब्द से ही स्पष्ट होता है अर्थात् गाया जाना।
    6-     कविता कवि के आन्तरिक अनुभावों की अभिव्यक्ति है जबकि गीत में अन्तरे में तुकान्त शब्द लाने के लिए जोर-जबरदस्ती की जाती      
      
      लेख को अधिक स्पष्ट करने के लिए मैं अपना एक बालगीत और एक बाल कविता उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ-
बालगीत (होली)
रंग-गुलाल साथ में लाया।
होली का मौसम अब आया।

पिचकारी फिर से आई हैं,
बच्चों के मन को भाई हैं,
तन-मन में आनन्द समाया।
होली का मौसम अब आया।।

गुझिया थाली में पसरी हैं,
पकवानों की महक भरी हैं,
मठरी ने मन को ललचाया।
होली का मौसम अब आया।।

बरफी की है शान निराली,
भरी हुई है पूरी थाली,
अम्मा जी ने इसे बनाया।
होली का मौसम अब आया।।


मम्मी बोली पहले खाओ,
उसके बाद खेलने जाओ,
सूरज ने मुखड़ा चमकाया।
होली का मौसम अब आया।

बालकविता (शहतूत)
कितना सुन्दर और सजीला।
खट्टा-मीठा और रसीला।।

हरे-सफेदबैंगनी-काले।
छोटे-लम्बे और निराले।।

शीतलता को देने वाले।
हैं शहतूत बहुत गुण वाले।।

पारा जब दिन का बढ़ जाता।
तब शहतूत बहुत मन भाता।

इसका वृक्ष बहुत उपयोगी।
ठण्डी छाया बहुत निरोगी।।

टहनी-डण्ठल सब हैं बढ़िया।
इनसे बनती हैं टोकरिया।।

  रेशम के कीड़ों को पालो।
घर बैठे धन खूब कमालो।।

आँगन-बगिया में उपजाओ।
खेतों में शहतूत उगाओ।।

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (14-11-2018) को "बालगीत और बालकविता में भेद" (चर्चा अंक-3155) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (14-11-2018) को "बालगीत और बालकविता में भेद" (चर्चा अंक-3155) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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