"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 6 नवंबर 2018

गीत "दीप खुशियों के जलाओ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दीप खुशियों के जलाओ, आ रही दीपावली।
रौशनी से जगमगाती, भा रही दीपावली।।

क्या करेगा तम वहाँ, होंगे अगर नन्हें दिए,
रात झिल-मिल कर रही नभ में सितारों को लिए,
दीन की कुटिया में खाना, खा रही दीपावली।
रौशनी से जगमगाती, भा रही दीपावली।।

नेह के दीपक सभी को अब जलाना चाहिए,
प्यार से उल्लास से, उत्सव मनाना चाहिए,
उन्नति का पथ हमें, दिखला रही दीपावली।
रौशनी से जगमगाती, भा रही दीपावली।।

शायरों-कवियों के मन में उमड़ते उद्गार हैं,
बाँटते हैं लोग अपनों को यहाँ उपहार हैं,
गीत-ग़ज़लों के तराने, गा रही दीपावली।
रौशनी से जगमगाती, भा रही दीपावली।।

गजानन के साथ, लक्ष्मी-शारदा की वन्दना,
देवताओं के लिए अब, द्वार करना बन्द ना,
मन्त्र को उत्कर्ष के, सिखला रही दीपावली।
रौशनी से जगमगाती, भा रही दीपावली।। 

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (07-11-2018) को "दीप खुशियों के जलाओ" (चर्चा अंक-3148) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

    उत्तर देंहटाएं

  2. satshriakaljio.blogspot.com
    दीप खुशियों के जलाओ, आ रही दीपावली।
    रौशनी से जगमगाती, भा रही दीपावली।।

    क्या करेगा तम वहाँ, होंगे अगर नन्हें दिए,
    रात झिल-मिल कर रही नभ में सितारों को लिए,
    दीन की कुटिया में खाना, खा रही दीपावली।
    रौशनी से जगमगाती, भा रही दीपावली।।
    बेहतरीन भावबोध बिम्ब और गेयता से भीगा भीगा गीत शास्त्री जी का :
    satshriakaljio.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails