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बुधवार, 7 नवंबर 2018

दोहे "धन्वन्तरि संसार को देते जीवनदान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


देती नरकचतुर्दशी, सबको यह सन्देश।
साफ-सफाई को करो, सुधरेगा परिवेश।।
--
दीपक यम के नाम का, जला दीजिए आज।
पूरी दुनिया से अलग, हो अपने अंदाज।।
--
जन्मे थे धनवन्तरी, करने को कल्याण।
रहें निरोगी सब मनुज, जब तक तन में प्राण।।
--
भेषज लाये धरा से, खोज-खोज भगवान।
धन्वन्तरि संसार को, देते जीवनदान।।
--
रोग किसी के भी नहीं, आये कभी समीप।
सबके जीवन में जलें, हँसी-खुशी के दीप।।
--
त्यौहारों की शृंखला, पावन है संयोग।
इसीलिए दीपावली, मना रहे सब लोग।।
--
कुटिया-महलों में जलें, जगमग-जगमग दीप।
सरिताओं के रेत में, मोती उगले सीप।।

1 टिप्पणी:

  1. satshriakaljio.blogspot.com
    kabirakhadabazarmein.blogspot.com
    veerusahab2017.blogspot.com
    veerujianand.blogspot.com
    देती नरकचतुर्दशी, सबको यह सन्देश।
    साफ-सफाई को करो, सुधरेगा परिवेश।।
    --
    दीपक यम के नाम का, जला दीजिए आज।
    पूरी दुनिया से अलग, हो अपने अंदाज।।
    --
    जन्मे थे धनवन्तरी, करने को कल्याण।
    रहें निरोगी सब मनुज, जब तक तन में प्राण।।
    --
    भेषज लाये धरा से, खोज-खोज भगवान।
    धन्वन्तरि संसार को, देते जीवनदान।।
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    रोग किसी के भी नहीं, आये कभी समीप।
    सबके जीवन में जलें, हँसी-खुशी के दीप।।
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    त्यौहारों की शृंखला, पावन है संयोग।
    इसीलिए दीपावली, मना रहे सब लोग।।
    --
    कुटिया-महलों में जलें, जगमग-जगमग दीप।
    सरिताओं के रेत में, मोती उगले सीप।।
    सेहत के हैं देवता धन्वन्तरि महान ,
    चरक संहिता में भरा पूरा रोग-निदान।
    स्वास्थ्य और पर्यावरण चेतना दोनों की एक ही नव्ज़ है यही सन्देश देते हैं शास्त्री जी के दोहे। बधाई।

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