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मंगलवार, 26 जून 2012

"आशा का दीप जलाया क्यों" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मन के सूने से मन्दिर में, आशा का दीप जलाया क्यों?
वीराने जैसे उपवन में, सुन्दर सा सुमन खिलाया क्यों?

प्यार, प्यार है पाप नही है, इसका कोई माप नही है,
यह तो है वरदान ईश का, यह कोई अभिशाप नही है,
दो नयनों के प्यालों में, सागर सा नीर बहाया क्यों?
वीराने जैसे उपवन में, सुन्दर सा सुमन खिलाया क्यों?

मुस्काओ स्वर भर कर गाओ, नगमों को और तरानों को,
गुंजायमान करदो फिर से, इन खाली पड़े ठिकानों को,
शीशे से भी नाजुक दिल मे, ग़म का गुब्बार समाया क्यों?
वीराने जैसे उपवन में, सुन्दर सा सुमन खिलाया क्यों?

स्वप्न सलोने जो छाये हैं, उनको आज धरातल दे दो,
पीत पड़े प्यारे पादप को, गंगा का निर्मल जल दे दो,
रस्म-रिवाजों के कचरे से, यह घर-द्वार सजाया क्यों?
वीराने जैसे उपवन में, सुन्दर सा सुमन खिलाया क्यों?

18 टिप्‍पणियां:

  1. जब प्रकोष्ठ में अंधियारा, कर देता है मारी-मारा ।

    उद्दीपन कर प्रेम दीप का, फैलाते हैं सद-उजियारा ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. रस्म-रिवाजों के कचरे से,यह घर-द्वार सजाया क्यों?
    वीराने जैसे उपवन मेंसुन्दर सा सुमन खिलाया क्यों?

    बहुत ही सुंदर गीत,,,,
    मुझे बहुत अच्छा लगा,,,,,बधाई

    RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: आश्वासन,,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  3. "रस्म-रिवाजों के कचरे से, यह घर-द्वार सजाया क्यों?
    वीराने जैसे उपवन में, सुन्दर सा सुमन खिलाया क्यों?"

    अति सुन्दर ... हमेशा की तरह...

    उत्तर देंहटाएं
  4. अंतिम दो पंक्तियों वाला संदेश अपना लिया जाये तो तमाम समस्याओं का निदान स्वतः हो जाये। समझने और पालन करने की आवश्यकता है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. प्यार, प्यार है पाप नही है, इसका कोई माप नही है,
    सार्थक सूत्र ..खूबसूरत गीत

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  8. रस्म-रिवाजों के कचरे से, यह घर-द्वार सजाया क्यों?

    आन्तरिक भावों के सहज प्रवाहमय
    सुन्दर रचना....

    उत्तर देंहटाएं
  9. स्वप्न सलोने जो छाये हैं, उनको आज धरातल दे दो,
    पीत पड़े प्यारे पादप को, गंगा का निर्मल जल दे दो,
    रस्म-रिवाजों के कचरे से, यह घर-द्वार सजाया क्यों?
    वीराने जैसे उपवन में, सुन्दर सा सुमन खिलाया क्यों?
    क्या कहने हैं अभिव्यक्ति को पंख लग गये हैं अर्थ को नए सौपान और उड़ान मिली है .

    उत्तर देंहटाएं

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