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गुरुवार, 7 जून 2012

"रार का सिलसिला नहीं होता" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


बात का ग़र ग़िला नहीं होता
रार का सिलसिला नहीं होता

ग़र न ज़ज़्बात होते सीने में
दिल किसी से मिला नहीं होता

आम में ज़ायका नहीं आता
 वो अगर पिलपिला नहीं होता

तिनके-तिनके अगर नहीं चुनते
तो बना घोंसला नहीं होता

दाद मिलती नहीं अगर उनसे
तो बढ़ा हौसला नहीं होता

प्यार में बेवफा अगर होते
संग में काफिला नहीं होता

रूप" आता नहीं बगीचे में,
फूल जब तक खिला नहीं होता

19 टिप्‍पणियां:

  1. ग़र न ज़ज़्बात होते सीने में
    दिल किसी से मिला नहीं होता …………खूबसूरत जज़्बात उकेरे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत बढ़िया मौसमी रचना ...वाह

    उत्तर देंहटाएं
  3. आम में ज़ायका नहीं आता
    वो अगर पिलपिला नहीं होता

    तिनके-तिनके अगर नहीं चुनते
    तो बना घोंसला नहीं होता

    Bahut khoob, Sundar !

    उत्तर देंहटाएं
  4. ग़र न ज़ज़्बात होते सीने में
    दिल किसी से मिला नहीं होता |

    बहुत सुन्दर रचना |

    मेरे नए पोस्ट में आपका स्वागत है-
    मेरी कविता:आंसू पश्चाताप के

    उत्तर देंहटाएं
  5. ग़र न ज़ज़्बात होते सीने में
    दिल किसी से मिला नहीं होता
    सब कुछ कह दिया शास्त्री जी आपने ......

    उत्तर देंहटाएं
  6. शनिवार 09/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों का स्वागत है . धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  7. आम में ज़ायका नहीं आता
    वो अगर पिलपिला नहीं होता

    दाद मिलती नहीं अगर उनसे
    तो बढ़ा हौसला नहीं होता

    प्यार में बेवफा अगर होते
    संग में काफिला नहीं होता

    सुंदर प्रस्तुति शास्त्री जी ,,,,,

    MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह! बड़ी खुबसूरत गजल....
    सादर बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  9. आम में ज़ायका नहीं आता
    वो अगर पिलपिला नहीं होता
    बहुत खूब.

    उत्तर देंहटाएं
  10. आम में ज़ायका नहीं आता
    वो अगर पिलपिला नहीं होता
    यह प्रयोग बहुत अच्छा लगा।

    उत्तर देंहटाएं
  11. दाद मिलती नहीं अगर उनसे
    तो बढ़ा हौसला नहीं होता

    वाह बहुत खूब .....और सच भी हैं ..

    उत्तर देंहटाएं
  12. ग़र न ज़ज़्बात होते सीने में
    दिल किसी से मिला नहीं होता !

    सारा खेल तो बस यहीं से सुरू होता है!!

    उत्तर देंहटाएं
  13. वाह कमाल की गज़ल शास्त्री जी बहुत ही सुंदर ।

    उत्तर देंहटाएं

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