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रविवार, 17 जून 2012

"मेरे पिता जी-पितृदिवस पर विशेष" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

    यह घटना सन् 1979 की है। उस समय मेरा निवास जिला-नैनीताल की नेपाल सीमा पर बसे कस्बे बनबसा में था।
      पिता जी और माता जी उन दिनों नजीबाबाद में रहते थे। लेकिन मुझसे मिलने के लिए बनबसा आये हुए थे।पिता जी की आयु उस समय 55-60 के बीच की रही होगी। शाम को वो अक्सर बाहर चारपाई बिछा कर बैठे रहते थे। उस दिन भी वो बाहर ही चारपाई पर बैठे थे।
तभी एक व्यक्ति मुझसे मिलने के लिए आया। वो जैसे ही मेरे पास आया, पिता जी एक दम तपाक से उठे और उसका हाथ इतना कस कर पकड़ा कि उसके हाथ से चाकू छूट कर नीचे गिर पड़ा। तब मुझे पता लगा कि यह व्यक्ति तो मुझे चाकू मारने के लिए आया था।
पिता जी ने अब उस गुण्डे को अपनी गिरफ्त में ले लिया था और वो उनसे छूटने के लिए फड़फड़ा रहा था परन्तु पकड़ ऐसी थी कि ढीली होने का नाम ही नही ले रही थी। अब तो यह नजारा देखने के लिए भीड़ जमा हो गई थी। इस गुण्डे टाइप आदमी की भीड़ ने भी अच्छी-खासी पिटाई लगा दी थी।
    छूटने का कोई चारा न देख इसने यह स्वीकार कर ही लिया कि डाक्टर साहब के पड़ोसी ने मुझे चाकू मारने के लिए 1000 रुपये तय किये थे और इस काम के लिए 100 रुपये पेशगी भी दिये थे।
    आज वह गुण्डा और मेरा उस समय का सुपारी देने वाला पड़ोसी इस दुनिया में नही है। परन्तु मेरे पिता जी 90 वर्ष की आयु में आज भी स्वस्थ हैं। मेरे साथ ही रहते हैं। आज मुझे समझ में आता है कि पिता यदि रक्षक हो तो पुत्र पर कोई आँच नही आ सकती है।
(मेरे परम पूज्य पिता श्री घासीराम आर्य एवं परम पूज्या माता श्रीमती श्यामवती देवी)
      बासठ वर्ष की आयु में भी मैं अपने आपको बच्चा ही समझता हूँ। क्योंकि मेरे माँ-बाप अभी जीवित हैं। मैं खुशनसीब हूँ कि माता-पिता जी का साया आज भी मेरे सिर पर है।
(मैं और मेरी जीवनसंगिनी श्रीमती अमर भारती)

19 टिप्‍पणियां:

  1. आपके ऊपर पिता का स्नेहिल छत्र ऐसे ही बना रहे, यही शुभकामनायें हैं।

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  2. मेरा पावन तीर्थ है, नगर खटीमा धाम |
    देखा घर बनबसा भी, एक जून की शाम |
    एक जून की शाम, दर्श चाचा-चाची के |
    तीन दिनों हम साथ, रहे प्रांजल-प्राची के |
    चार पीढियां साथ, बड़े आश्रम में डेरा |
    मिला परम सौभाग्य, धन्य है जीवन मेरा ||

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  3. आप बहुत खुशनसीब है कि आज भी माता पिता की स्नेहिल छत्रछाया मिल रही है,बहुत२ शुभकामनाए,,,,,,,,

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  4. बना रहे स्नेह का साया ..... शुभकामनायें

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  5. आप बहुत भाग्यशाली हैं, माता पिता की छात्र छाया आज भी आपके सर पर है.आपकी प्रतिभा और वैभव उन्हीं के प्रताप से है. बहुत बहुत शुभकामनाएं.

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  6. क्या बात है!!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 18-06-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-914 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  7. बड़ों के रहते हमें क्या फ़िक्र.......
    मेरा प्रणाम पहुंचे पिताश्री को.....

    सादर

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  8. स्नेह बना रहे..... शुभकामनायें

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  9. happy father's day.bhagvaan kare yeh saaya humesha sabhi ke sir par bana rahe.humara bhi mammi papa ko pranaam.

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  10. मात पिता का सानिद्ध्य ही आपकी अजस्र ऊर्जा का स्रोत बना हुआ है आपकी रचनात्मकता का शिखर और ऊपर की और उन्मुख है .बढ़िया उत्प्रेरक पोस्ट पित्री दिवस मुबारक .

    जिन मात पिता की सेवा की उन और को नाम लियो न लियो ,जिनके हृदय श्री राम बसे ....

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  11. पिता का स्नेहिल वरद हस्त हमेशा बना रहे।

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  12. वाकई शास्त्री जी, आप भाग्यशाली है और ईश्वर माता पिता को लम्बी आयु दे. उनकी छत्रछाया सदैव ऐसी ही बनी रहे.

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  13. आप पर यह छत्र छाया सदा बनी रहे

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  14. बिलकुल सही कथन हैं शास्त्री जी आपके। हम आपके माता जी एवं पिताजी के स्वस्थ उज्ज्वल दीर्घायुष्य की मंगल कामना करते हैं।

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  15. बहुत खुशनसीब हैं आप !!
    पितृदिवस पर शुभकामनाऎं ।

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  16. खुशनसीबी पर कोई शक नहीं ...यह साया बना रहे !
    शुभकामनायें !

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  17. ऐसे ही बिखरी रहे, बरगद की यह छांव।

    सादर।

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  18. kaun thaa wo kamzarf jo aapko chaku maarne aaya thaa....chalo ishwar uski aatma ko bhee shaanti de....pitaji ka saaya hamesha bana rahe aap par.!!

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