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बुधवार, 13 जून 2012

"मीठा रस लीची के अन्दर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हरी, लाल और पीली-पीली!
लीची होती बहुत रसीली!!
 IMG_1175
गायब बाजारों से केले।
सजे हुए लीची के ठेले।।
 
आम और लीची का उदगम।
मनभावन दोनों का संगम।।
 
लीची के गुच्छे हैं सुन्दर।
मीठा रस लीची के अन्दर।।
 IMG_1178
गुच्छा प्राची के मन भाया!
उसने उसको झट कब्जाया!!
 IMG_1179
लीची को पकड़ा, दिखलाया!
भइया को उसने ललचाया!!

प्रांजल के भी मन में आया!
सोचा इसको जाए खाया!!
IMG_1180 
गरमी का मौसम आया है!
लीची के गुच्छे लाया है!!
IMG_1177 
दोनों ने गुच्छे लहराए!
लीची के गुच्छे मन भाए!!

15 टिप्‍पणियां:

  1. meethi rachna....kal raat maine bhee litchi lee thee....lekin andhere ka faayda uthaa kar thele wale ne mujhe kharab litchi de dee....1 kg mein 500 gm kharab nikli...

    उत्तर देंहटाएं
  2. ललचाय रही लुच्ची लीची, मन सबका भरमाये ।

    प्राची प्रांजल को बाबा जी, लाकर खूब खिलाये ।

    देहरादून उत्तरांचल की, लीची लेकिन खट्टी-

    यह रविकर धनबाद बसा है, कैसे लीची खाए ।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बिल्कुल समयानुसार लीची की तरह मीठी मीठी सी रचना है. शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  4. मजा आ गया!...हर रोज एक नया फ्रूट तश्तरी में सजा के आप पेश कर रहे है...अनोखा,रसीला और चटपटा अनुभव!

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह,,,, बहुत सुंदर प्रस्तुति,,,बेहतरीन मीठी रसीली रचना,,,,,

    MY RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: विचार,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  6. लीची के गुच्छे मन भाए!! ekdam.....

    उत्तर देंहटाएं
  7. चित्रों सहित रसीली लीची...खाने का मन तो कर ही जाएगा|

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  8. आम और लीची का उदगम।
    मनभावन दोनों का संगम।।

    लोक लुभाऊ ,मन भाऊ ,लीची के गीत ,

    बालक करते इससे प्रीत .

    रूप देख मत हो ,भय भीत

    उत्तर देंहटाएं
  9. इतनी मीठी हैं की बस ........मुँह में पानी आ गया

    उत्तर देंहटाएं
  10. आपकी पोस्ट कल 14/6/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा - 902 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  11. लीची जितनी मीठी और रसीली कविता..

    उत्तर देंहटाएं
  12. मयंक जी अब तो हमारा भी मन ललचा गया ...

    उत्तर देंहटाएं

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