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बुधवार, 13 जून 2012

"खरबूजों का मौसम आया" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

पिकनिक करने का मन आया!
मोटर में सबको बैठाया!!
family_car_250
पहुँच गये जब नदी किनारे!
खरबूजे के खेत निहारे!!
_44621951_07melon_afp
ककड़ी, खीरा और तरबूजे!
कच्चे-पक्के थे खरबूजे!!
prachi&pranjal
प्राची, किट्टू और प्रांजल!
करते थे जंगल में मंगल!!
rcmelon
लो मैं पेटी में भर लाया!
खरबूजों का मौसम आया!!
picknic
देख पेड़ की शीतल छाया!
हमने आसन वहाँ बिछाया!!
जम करके खरबूजे खाये!
शाम हुई घर वापिस आये!!

11 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ...बढिया रही ये पिकनिक संग खरबूजों के

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  2. खाता देख आप सब को
    हमारे मुहँ में भी पानी आए |
    हा हा हा....शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं
  3. काश हमें भी नसीब होते ये ताज़े फल.............

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह तो गोया गर्मी के भी फ़ुल फ़ुल मज़े । बहुत सुंदर जी बहुत सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  5. खरबूजे को देखकर, बदले रविकर रंग ।
    पर पानी-पानी हुआ, बिन पानी है दंग।

    बिन पानी है दंग, ढूंढता शीतल छाया ।
    उत्तरांचल कोयल, इत कोयला गर्माया ।

    करिए खुब आनंद, सदा किलकारी गूंजे ।
    भेजो झोंके चंद, रंग बदले खरबूजे ।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह... सुन्दर प्रस्तुति.
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  7. फिर से चर्चा मंच पर, रविकर का उत्साह |

    साजे सुन्दर लिंक सब, बैठ ताकता राह ||

    --

    शुक्रवारीय चर्चा मंच

    उत्तर देंहटाएं
  8. बड़ी मीठी पोस्टें आ रही हैं, कल लीची और आज खरबूजा।

    उत्तर देंहटाएं

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