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शनिवार, 9 जून 2012

"माली अब गद्दार हो गये" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


रिश्ते-नाते, आपसदारी, कलयुग में व्यापार हो गये।
पगड़ी पर जो दाग लगाते, बे-गैरत सरदार हो गये।।

असरदार हो गये किनारे, फिरते दर-दर, मारे-मारे,
खुद्दारी की माला जपते, माली अब गद्दार हो गये।।

मन्त्री-सन्त्री और विधायक, खुलेआम कानून तोड़ते,
दूध-दही की रखवाली में, बिल्ले पहरेदार हो गये।

नैतिक और अनैतिकता से, आय-आय कैसे भी आये,
घोटालों में लिप्त धुरन्धर, सत्ता के हकदार हो गये।

अपने होठों को सी लेना, जनता की ये लाचारी है,
रोटी-रोजी के बदले में, भाषण लच्छेदार हो गये।

कहीं कीच में कमल खिला है, कहीं हाथ को राज मिला है,
मौन हो गये कर्म यहाँ पर, मुखरित अब अधिकार हो गये।

14 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. नेता,चोर,और तनखैया, सियासती भगवांन हो गए
    अमरशहीद मातृभूमि के, गुमनामी में आज खो गए,
    भूल हुई शासन दे डाला, सरे आम दु:शाशन को
    हर चौराहा चीर हरन है, व्याकुल जनता राशन को,

    उत्तर देंहटाएं
  3. मन्त्री-सन्त्री और विधायक, खुलेआम कानून तोड़ते,
    दूध-दही की रखवाली में, बिल्ले पहरेदार हो गये।……सच्चाई को बखूबी उकेरा है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. रिश्ते-नाते, आपसदारी, कलयुग में व्यापार हो गये।
    पगड़ी पर जो दाग लगाते, बे-गैरत सरदार हो गये।।

    जले पर नमक छिड़क दिया आपने , बहुत सुन्दर !

    उत्तर देंहटाएं
  5. सब कुछ ऐसा ही हो रहा है और हम टुकर टुकर देख रहे है!...आपने यथार्थ प्रस्तुत किया है...आभार!

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  6. आज की सियासत पर करारा व्यंग्य...

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  7. वाह क्या खूब लिखा हैं

    रखवाली वाला ही ...डाकू बन कर लूटने चला हैं...

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  8. ऐसे ग़द्दारों से देश को बचाओ भगवान!

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  9. बिल्ले पहरेदार हो गये।

    सौ बात की एक बात

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ही लाजवाब शास्त्री जी ...
    कमाल की रचना ... व्यंग के साथ सचाई लिखी है आपने ... नमस्कार ...

    उत्तर देंहटाएं

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