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मंगलवार, 5 जून 2012

"Come slowly(धीरे से आओ):Emily Dickinson" (अनुवादक-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

"Come slowly(धीरे से आओ):Emily Dickinson"
मेरे हैं अनछुए ओंठ
तुम छू लो धीरे से आकर!
जैसे मधु की मक्खी
हो जाती है मदहोश
चमेली की सुगन्ध को पाकर!!
घूमती उसके चारों ओर!
खिंची आती है वो बिनडोर!!
कुछ विलम्ब ही सही
पहुँच जाती प्रसून के पास!
करा देती अपना आभास!!
रिझाती उसको कर गुंजार!
प्रकट कर देती सच्चा प्यार!!
शहद का करती है आकलन
और सुध-बुध खो देती है!
मधुर चुम्बन ले लेती है!!
Emily Dickinson

8 टिप्‍पणियां:

  1. कोमल भावों को सहेज कर रखता हुआ सुन्दर अनुवाद..

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  2. खुशकिस्मत है वो मधु मक्खी

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत कोमल भावो का काव्यानुवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपके अनुवाद में रोचकता और सरसता होती है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

    उत्तर देंहटाएं

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