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बुधवार, 6 जून 2012

"जल की मोटी बून्दें आयी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


रिमझिम-रिमझिम पड़ीं फुहारे।
बारिश आई अपने द्वारे।।

तन-मन में थी भरी हताशा,
धरती का था आँचल प्यासा,
झुलस रहे थे पौधे प्यारे।
बारिश आई अपने द्वारे।।

आँधी आई, बिजली कड़की,
जोर-जोर से छाती धड़की,
अँधियारे ने पाँव पसारे।
बारिश आई अपने द्वारे।।

जल की मोटी बून्दें आयी,
शीतलता ने अलख जगाई,
खुशी मनाते बालक सारे।
बारिश आई अपने द्वारे।।

अब मौसम हो गया सुहाना,
आम रसीले जमकर खाना,
पर्वत से बह निकले धारे।
बारिश आई अपने द्वारे।।

15 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बारिश का बहुत ही सुंदर चित्रण करता सु मधुर गीत....

    उत्तर देंहटाएं
  2. बारिश का सुन्दर चित्रण करती रचना ,,,,,

    MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  3. बारिश आई?? बहुत बधाई...
    सुन्दर गीत सर...
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  4. ऐसी गर्मी में बारिश मन मोह लेती है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बारिश मुबारक हो सर!

    संभव हो तो कुछ फुहारें लखनऊ भी भेज दीजिये :)

    वैसे आपकी रचना पढ़कर बारिश का मानसिक आनंद तो ले ही लिया।

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  6. अभी तो बारिश के कोई आसार नजर नहीं आते पर आपकी रचना ने बारिश की बूदों से मन भिगो दिया |उत्तम रचना |सादर
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  7. इस मौसम का बड़ा सुहाना चित्रण, मेघ भी, आम भी और बरखा की मोटी मोटी बूँदें भी. सुन्दर रचना, बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  8. बारिश और आम जिस कविता में हो वह रस से सराबोर हो जाती है।

    उत्तर देंहटाएं
  9. देखिये बारिश के बारे में पढ़ कर बहुत अच्छा लगा लेकिन हम तो अभी गर्मी में ही भुन रहे हें, पता नहीं कब ये कविता हमारे यहाँ भी साकार होगी.

    उत्तर देंहटाएं
  10. अब मौसम हो गया सुहाना,
    आम रसीले जमकर खाना,
    पर्वत से बह निकले धारे।
    बारिश आई अपने द्वारे।।

    उत्तर देंहटाएं
  11. इससे पूर्व की दोनों पोस्ट एक अनुवाद आधारित
    Emily Dickinson"
    तथा एक

    सूरज की भीषण गर्मी से,
    लोगो को राहत पहँचाता।।
    लू के गरम थपेड़े खाकर,
    अमलतास खिलता-मुस्काता।।अपना अलग सौन्दर्य लिए हैं

    उत्तर देंहटाएं
  12. पहली बारिश का सुंदर चित्रण.

    उत्तर देंहटाएं

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