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बुधवार, 20 जून 2012

"आगे कोई सोपान नहीं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दुर्गम पथरीला पथ है, आगे कोई सोपान नहीं।
मैदानों से पर्वत पर, चढ़ना होता आसान नहीं।।

रहते हैं आराध्य देव, उत्तुंग शैल के शिखरों में,
कैसे दर्शन करूँ आपके शक्ति नहीं है पैरों में,
चरणामृत मिल जाए मुझे, ऐसा मेरा शुभदान नहीं।
मैदानों से पर्वत पर, चढ़ना होता आसान नहीं।।

तुम हो जग के कर्ता-हर्ता, शिव-शम्भू कल्याण करो,
उरमन्दिर में पार्वती के साथ, देव तुम चरण धरो,
पूजा और वन्दना का, मुझ अज्ञानी को ज्ञान नहीं।
मैदानों से पर्वत पर, चढ़ना होता आसान नहीं।।

भोले-भण्डारी के दर से, कोई नहीं खाली जाता,
जो धरता है ध्यान आपका, वो इच्छित फल को पाता,
जिससे उपमा हो शिव की, ऐसा कोई उपमान नहीं।
मैदानों से पर्वत पर, चढ़ना होता आसान नहीं।।

11 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति |
    आभार ||
    शायद प्रिंटिंग दोष है -

    भोले-भण्डारी के दर से, की नहीं खाली जाता,

    उत्तर देंहटाएं
  2. हाँ जी प्रिंटिंग मिस्टेक ही थी। अब सुधार कर दिया है।
    इंगित कराने के लिए आपका आभार रविकर जी!

    उत्तर देंहटाएं
  3. गुरुवर की होवे कृपा, मिले मार्ग-निर्देश |
    शंकर के दर्शन सुलभ, चढ़ने में क्या क्लेश ??

    उत्तर देंहटाएं
  4. गुरुवर की होवे कृपा, मिले मार्ग-निर्देश |
    शंकर के दर्शन सुलभ, चढ़ने में क्या क्लेश ??



    चढ़ने में क्या क्लेश, सीड़ियाँ चढ़ते जाएँ ।

    जय जय जय गुरुदेव, खटाख़ट बढ़ते जाएँ ।



    बुद्धू पंगु-गंवार, बड़ा भोला है रविकर ।

    सर-सरिता गिरि-खोह, कहाँ बाधा हैं गुरुवर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  5. भोले-भण्डारी के दर से, कोई नहीं खाली जाता,
    जो धरता है ध्यान आपका, वो इच्छित फल को पाता,
    जिससे उपमा हो शिव की, ऐसा कोई उपमान नहीं।
    मैदानों से पर्वत पर, चढ़ना होता आसान नहीं।।
    पंख लग गए हैं शिव स्तुति को . अच्छी प्रस्तुति .कृपया यहाँ भी पधारें -


    बुधवार, 20 जून 2012
    क्या गड़बड़ है साहब चीनी में
    क्या गड़बड़ है साहब चीनी में
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  6. भोले बाबा अपनी राहें कठिन बनाये बैठे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  7. जिससे उपमा हो शिव की, ऐसा कोई उपमान नहीं।
    मैदानों से पर्वत पर, चढ़ना होता आसान नहीं।।

    जय हो भोले भंडारी की,,,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  8. 'मैदानों से पर्वत पर, चढ़ना होता आसान नहीं।।'
    - आसान कैसे हो - हाँसत-खेलत हरि मिलें तो हर कोइ लेय रिझाय!

    उत्तर देंहटाएं

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