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शनिवार, 2 जून 2012

"मेरी पुरानी डायरी से" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


बचपन बीता गयी जवानी, कठिन बुढ़ापा आया।
कितना है नादान मनुज, यह चक्र समझ नही पाया।

अंग शिथिल हैं, दुर्बल तन है, रसना बनी सबल है।
आशाएँ और अभिलाषाएँ, बढ़ती जाती प्रति-पल हैं।।

धीरज और विश्वास संजो कर, रखना अपने मन में।
रंग-बिरंगे सुमन खिलेंगे, घर, आंगन, उपवन में।।

यही बुढ़ापा अनुभव के, मोती लेकर आया है।
नाती-पोतों की किलकारी, जीवन में लाया है।।

मतलब की दुनिया मे, अपने कदम संभल कर धरना।
वाणी पर अंकुश रखना, टोका-टाकी मत करना।।

देख-भालकर, सोच-समझकर, ही सारे निर्णय लेना।
भावी पीढ़ी को उनका, सुखमय जीवन जीने देना।।

22 टिप्‍पणियां:

  1. विचारणीय बातें लिए पंक्तियाँ

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  2. Nice poem.
    रोटियों को बीनने को, आ गये फकीर हैं।
    अमन-चैन छीनने को, आ गये हकीर हैं।।

    तिजारतों के वास्ते, बना रहे हैं रास्ते,
    हरी घास छीलने को, आ गये अमीर हैं।

    http://mushayera.blogspot.in/2012/06/blog-post.html

    उत्तर देंहटाएं
  3. मतलब की दुनिया मे, अपने कदम संभल कर धरना।
    वाणी पर अंकुश रखना, टोका-टाकी मत करना।।

    सही कहा आपने....

    उत्तर देंहटाएं
  4. मतलब की दुनिया मे, अपने कदम संभल कर धरना।
    वाणी पर अंकुश रखना, टोका-टाकी मत करना।।
    सार्थक सन्देश देती
    सांगीतिक रचना .बधाई स्वीकार करें .
    कृपया यहाँ भी पधारें -
    साधन भी प्रस्तुत कर रहा है बाज़ार जीरो साइज़ हो जाने के .
    गत साठ सालों में छ: इंच बढ़ गया है महिलाओं का कटि प्रदेश (waistline),कमर का घेरा
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    लीवर डेमेज की वजह बन रही है पैरासीटामोल (acetaminophen)की ओवर डोज़
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  5. देख-भालकर, सोच-समझकर, ही सारे निर्णय लेना।
    भावी पीढ़ी को उनका, सुखमय जीवन जीने देना।।

    जीवन की सुन्दर सीख देती रचना के लिए आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. शिक्षाप्रद सुन्दर रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुंदर विचारणीय रचना..
    सुंदर अभिव्यक्ती....

    उत्तर देंहटाएं
  8. अनुकरणीय संदेश है यह।

    उत्तर देंहटाएं
  9. भावी पीढ़ी को उनका, सुखमय जीवन जीने देना।।

    सुंदर वि‍चार

    उत्तर देंहटाएं
  10. Anubhav bolta hae,jaroorat sab ko sheekh lene ki hae,
    ACHHI RACHNA

    उत्तर देंहटाएं
  11. चिल्लाता है चातक प्यासा,
    बेहतरीन शब्द चयन राग और आस दोनों से संसिक्त करुणा उपजाता पर्यावरण प्रकृति प्रेम से संसिक्त गीत और सचेत कवि दृष्टि क्या कहने हैं इस गीत के, सौंदर्य देखते ही बनता है इस रूप गर्वित गद्य गीत का .ओह हमसे छोट गया था यह इतना सुन्दर मनोहर गीत ...
    कृपया यहाँ भी पधारें -
    साधन भी प्रस्तुत कर रहा है बाज़ार जीरो साइज़ हो जाने के .
    गत साठ सालों में छ: इंच बढ़ गया है महिलाओं का कटि प्रदेश (waistline),कमर का घेरा
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    लीवर डेमेज की वजह बन रही है पैरासीटामोल (acetaminophen)की ओवर डोज़
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  12. waqt badle tho badle par aapke likhne ka zazbaa yun hi kaayam rahe...

    उत्तर देंहटाएं
  13. यही बुढापा अनुभव के मोती लेकर आया
    नाती-पोतों की किलकारी,जीवन में लाया—
    सही कहा,यदि बुढापा ना आया होता तो किलकारियों से
    झोली कैसे भर पाती.

    उत्तर देंहटाएं
  14. कल 07/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  15. आदिशंकराचार्य की भज-गोविन्दम' याद आ गयी..

    और जगजीत जी का गया हुआ 'बीत गए दिन.. '

    सादर

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  16. वाह ... बहुत ही बढि़या।

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  17. हर उम्र की एक गरिमा होती है ...जो वह अपने साथ लेकर आती है ....हमें उसका सम्मान करना चाहिए ...सुन्दर , सार्थक रचना

    उत्तर देंहटाएं
  18. ek anubhawi insan ki jiwangatha....prerak wa vicharniya prastuti

    उत्तर देंहटाएं

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