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शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

“चुने हुए फुटकर दोहे” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

चार चरण दो पंक्तियाँ, लगता ललित-ललाम।
इसीलिए इस छन्द ने, पाया दोहा नाम।१।

लुप्त हो गया काव्य का, नभ में सूरज आज।
बिना छन्द रचना करें, ज्यादातर कविराज।२।

बिन मर्यादा यश मिले, छन्दों का क्या काम।
पद्य बताकर गद्य को, करते हैं बदनाम।३।

चार दिनों की ज़िन्दग़ी, काहे का अभिमान।
धरा यहीं रह जायेगा, धन के साथ गुमान।४।

प्यार जगत में छेड़ता, मन वीणा के तार।
कुदरत ने हमको दिया, ये अमोल उपहार।५।

प्यार नहीं है वासना, ये तो है अनुबन्ध।
प्यार शब्द से जुड़ा है, तन-मन का सम्बन्ध।६।

चटके दर्पण की कभी, मिटती नहीं दरार।
सिर्फ दिखावे के लिए, ढोंगी करता प्यार।७।

ढाई आखर प्यार का, देता है सन्ताप।
हार-जीत के खेल में, बढ़ जाता है ताप।९।

मुखिया की चलती नहीं, सबके भिन्न विचार।
ऐसा घर कैसे चले, जिसमें सब सरदार।१०।

11 टिप्‍पणियां:

  1. ढाई आखर प्यार का, देता है सन्ताप।
    हार-जीत के खेल में, बढ़ जाता है ताप।९।
    वाह ... बेहतरीन

    उत्तर देंहटाएं
  2. फिर स्थापित होगी छंद बद्ध रचनाएँ |
    आभार ||

    उत्तर देंहटाएं
  3. काम बासना के बास भाव भयउ घिन अंग ।
    भए जहँ प्रेम भाव पास रंगे रति के रंग ।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. लुप्त हो गया काव्य का, नभ में सूरज आज।
    बिना छन्द रचना करें, ज्यादातर कविराज।,,,,सच कहा आपने,,,

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. मयंक जी से अनुप्राणित कुंडली


      हृदय सुप्‍त मस्तिष्‍क जगा, लुप्‍त हो रहे छंद।

      पाठक-श्रोता भागते कविता होती मंद।।
      कविता होती मंद आज बदली परिभाषा।

      धूमिल होती काव्‍य सृजन की कोई आशा।।

      बिना परिश्रम कविता का झंडा लहराए।

      जिसके जी में आ जाए वह कवि बन जाए।।
      -विनय कुमार पाण्‍डेय

      हटाएं
  5. बिलकुल सही लिखा गया है "चार दिन की जिन्दगी काहे का अभिमान"

    और सारा जग कहीं ज्यादा तो कहीं कम अभिमानियों से भरा पड़ा है

    "ज्ञान का गुरूर कितना"

    उत्तर देंहटाएं
  6. लुप्त हो गया काव्य का, नभ में सूरज आज।
    बिना छन्द रचना करें, ज्यादातर कविराज।२।

    बिन मर्यादा यश मिले, छन्दों का क्या काम।
    पद्य बताकर गद्य को, क्यों करते बदनाम।३।

    साहित्य में समय दर समय बदलाव आते रहते हैं ...फिर भी ये पोस्ट आजकल के काव्य पर एक सटीक तंज है.

    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://rohitasghorela.blogspot.com/2012/11/3.html

    उत्तर देंहटाएं
  7. Ahaa, its good discussion about this piece of writing at this place at this webpage, I have read
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    उत्तर देंहटाएं

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