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शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

"हिन्दी को बिसराया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गौरय्या का नीड़, चील ने हथियाया है
हलो-हाय का पाठ मातमी समझाया है

जाल बिछाया अपना, छीनी है हिन्दी की बिन्दी
अपने घर में हुई परायी, अपनी भाषा हिन्दी
खोटे सिक्के से लोगों को बहलाया है

हिन्दीभाषा से हमने, भारत को मुक्त कराया था
हिन्दी में मत माँगे थे, सत्ता का आसन पाया था
लेकिन गद्दी पाते ही हिन्दी को बिसराया है

चीन और जापान आज भाषा के बल पर आगे
किन्तु हमारे खेवनहारे नहीं नींद से जागे
खाया अपना, राग विदेशी अपनाया है

विश्वपटल पर कैसे होगी, अब पहचान हमारी
वाणी क्यों हो गयी विदेशी, ऐसी क्या लाचारी
पुरखों का अभिमान और सम्मान गँवाया है

अन्धे-गूँगे-बहरों को क्या अपनी व्यथा सुनायें
हुक्मरान हिन्दी के दिन को हिन्दी-डे बतलाएँ
मोहक हलवा-पूड़ी छोड़ा, पिज्जा-बर्गर खाया है

14 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति-
    हिंदी पखवारे की शुभकामनायें-

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुँदर है रचना
    बाकी बेवकूफों से
    क्या है कहना !

    उत्तर देंहटाएं
  3. हार्दिक शुभकामनाएं गुरु जी ,प्रणाम

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुंदर रचना...
    आप की ये रचना आने वाले शनीवार यानी 14 सितंबर 2013 को ब्लौग प्रसारण पर लिंक की जा रही है...आप भी इस प्रसारण में सादर आमंत्रित है... आप इस प्रसारण में शामिल अन्य रचनाओं पर भी अपनी दृष्टि डालें...इस संदर्भ में आप के सुझावों का स्वागत है...

    उजाले उनकी यादों के पर आना... इस ब्लौग पर आप हर रोज 2 रचनाएं पढेंगे... आप भी इस ब्लौग का अनुसरण करना।

    आप सब की कविताएं कविता मंच पर आमंत्रित है।
    हम आज भूल रहे हैं अपनी संस्कृति सभ्यता व अपना गौरवमयी इतिहास आप ही लिखिये हमारा अतीत के माध्यम से। ध्यान रहे रचना में किसी धर्म पर कटाक्ष नही होना चाहिये।
    इस के लिये आप को मात्रkuldeepsingpinku@gmail.com पर मिल भेजकर निमंत्रण लिंक प्राप्त करना है।



    मन का मंथन [मेरे विचारों का दर्पण]


    उत्तर देंहटाएं
  5. आज की विशेष बुलेटिन हिंदी .... ब्लॉग बुलेटिन में आपकी इस पोस्ट को भी शामिल किया गया है। सादर .... आभार।।

    उत्तर देंहटाएं

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