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गुरुवार, 19 सितंबर 2013

"हिन्दी पखवाड़ा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हिन्दी भाषा का हुआ, दूषित विमल-वितान।
स्वर-व्यंजन की है नहीं, हमको कुछ पहचान।।

बात-चीत परिवेश में, अंग्रेजी उपलब्ध।
क्यों हमने अपना लिए, विदेशियों के शब्द।।

सिसक रही है वर्तनी, खिसक रहा आधार।
अपनी हिन्दी का किया, हमने बण्टाधार।।

बेमन से हम बाँटते, भाषा का उपहार।
पन्द्रह दिन के वास्ते, हिन्दी से है प्यार।।

हिन्दी पखवाड़ा गया, देकर ये सौगात।
एक साल के बाद फिर, हिन्दी की हो बात।।

11 टिप्‍पणियां:

  1. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार (20-09-2013) के चर्चामंच - 1374 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. हिन्दी का प्रयोग पूरे वर्ष रहे और शुद्ध रूप में रहे।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी यह सुन्दर रचना दिनांक 20.09.2013 को http://blogprasaran.blogspot.in/ पर लिंक की गयी है। कृपया इसे देखें और अपने सुझाव दें।

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी यह सुन्दर रचना दिनांक 20.09.2013 को http://blogprasaran.blogspot.in/ पर लिंक की गयी है। कृपया इसे देखें और अपने सुझाव दें।

    उत्तर देंहटाएं
  5. है जिसने हमको जन्म दिया,हम आज उसे क्या कहते है ,
    क्या यही हमारा राष्र्ट वाद ,जिसका पथ दर्शन करते है
    हे राष्ट्र स्वामिनी निराश्रिता,परिभाषा इसकी मत बदलो
    हिन्दी है भारत माँ की भाषा ,हिंदी को हिंदी रहने दो,,,

    बहुत खूब,सुंदर रचना !

    RECENT POST : हल निकलेगा

    उत्तर देंहटाएं
  6. सिसक रही है वर्तनी, खिसक रहा आधार। अपनी हिन्दी का किया, हमने बण्टाधार।।
    शतप्रतिशत सही लिखा है आपनें !!

    उत्तर देंहटाएं
  7. हिंदी पखवारे की असीम शुभकामनायें-

    उत्तर देंहटाएं
  8. हिंदी पखवाड़े की अनन्त शुभ एवं मंगलकामनाये ,,हमारी हिंदी चिरायु और स्वस्थ रहे इसी आशा और सम्भावना के साथ !!....हम सभी सार्थक हो

    उत्तर देंहटाएं
  9. हिन्दी भाषा का हुआ, दूषित विमल-वितान।
    स्वर-व्यंजन की है नहीं, हमको कुछ पहचान।।
    .........बेहद सुंदर...सार्थक रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  10. हिन्दी को भी सम्मिलित प्रयासों की आवश्यकता है.

    उत्तर देंहटाएं

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