"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 24 सितंबर 2013

"अपना हिन्दुस्तान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जब होगा अपने भारत में, उन्नत-सबल किसान।
तब जग का शिरमौर बनेगा, अपना हिन्दुस्तान।।

भ्रष्टाचारी जब खेतों में, कंकरीट नहीं बोयेंगे,
गट्ठर बाँध अन्न की जब सब, अपने सिर पर ढोयेंगे,
कहलायेगा तब ही अपना भारत देश महान।
तब जग का शिरमौर बनेगा, अपना हिन्दुस्तान।।

भोग छोड़कर लोग यहाँ जब, सहज योग अपनायेंगे,
मदिरा-मांस छोड़ प्राणी, जब शाक-सब्जियाँ  खायेंगे,
भौंडे गाने छोड़ गायें सबदेशभक्ति के गान।
तब जग का शिरमौर बनेगा, अपना हिन्दुस्तान।।

जब शिक्षा की दूकानों में, ज्ञान न बेचा जायेगा,
तब अध्यापक को श्रद्धा से, गुरू पुकारा जायेगा,
विद्यालय से शिक्षित होकर, निकलेंगे विद्वान।
तब जग का शिरमौर बनेगा, अपना हिन्दुस्तान।।

जिस दिन वीर सैनिकों का सम्मान बढ़ाया जायेगा,
दुश्मन को उसकी भाषा में, सबक सिखाया जायेगा,
क़ायम रखना होगा हमको, आन-बान-अभिमान।
तब जग का शिरमौर बनेगा, अपना हिन्दुस्तान।।

अपनी धरती पर, अपना कानून बनाना होगा,
सत्ता से सब गद्दारो को, हमें हटाना होगा,
अलग बनानी होगी अपनी, दुनिया में पहचान।
तब जग का शिरमौर बनेगा, अपना हिन्दुस्तान।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी यह रचना कल बुधवार (25-09-2013) को ब्लॉग प्रसारण : 127 पर लिंक की गई है कृपया पधारें.
    सादर
    सरिता भाटिया
    बस इक नजर चाहिए :
    ''गुज़ारिश''

    उत्तर देंहटाएं
  3. हाँ जी ...सही कहा ..एक अलग पहचान तो बनानी ही होगी

    उत्तर देंहटाएं
  4. सही बातें कही आपने शास्त्री जी, बहुत उम्दा रचना |

    उत्तर देंहटाएं
  5. देश को यश देना ही हमारा राष्ट्रधर्म है।

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails