"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

सोमवार, 16 सितंबर 2013

1850वीं पोस्ट "तीन मुक्तक" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

"तीन मुक्तक"
(१)
आग को आग समझो, जलाती है ये
अपनी औकात सबको बताती है ये
दिल के ज़ज़्बात से खेलना मत कभी,
अच्छे-अच्छों के दिल को सताती है ये
(२)
श्वेत परिधान हैं, सादगी के लिए
सभ्यता है बनी, आदमी के लिए
दाग माथे का हो या हो पौशाक का
दाग़ तो दाग़ है ज़िन्दग़ी के लिए
(३)
सात रंग से भरा, फाग है ज़िन्दग़ी
दोस्ती का चमन, बाग है ज़िन्दग़ी
मत ग़लत सुर लगाना, कभी भी यहाँ
गीत और प्रीत का राग है ज़िन्द़गी 

13 टिप्‍पणियां:

  1. वाह वाह वाह आदरणीय गुरुदेव श्री हृदयस्पर्शी क्या कहने लाजवाब लाजवाब मुक्तक बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

    उत्तर देंहटाएं
  2. नमस्कार आपकी यह रचना कल मंगलवार (17-09-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

    उत्तर देंहटाएं
  3. 1850वीं पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई,और शुभकामनाए...

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्षमा करें उल्लूक अपनी धुन में रह गया
    बधाई 1850 पर देना वाकई में भूल गया !

    बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार १ ७ /९ /१ ३ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका वहां स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. 1850वीं पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई,और शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  7. सात रंग से भरा, फाग है ज़िन्दग़ी
    दोस्ती का चमन, बाग है ज़िन्दग़ी
    मत ग़लत सुर लगाना, कभी भी यहाँ
    गीत और प्रीत का राग है ज़िन्द़गी
    फुटपाथ की आस ,राग विहाग है ज़िन्दगी ,
    सुहागन का सुहाग है ज़िदगी।

    बढ़िया रचना। सार्थक अनुबोधक।

    उत्तर देंहटाएं
  8. रंगबिरंगी इस दुनिया में, रंगों की मर्यादा समझें। सुन्दर गीत

    उत्तर देंहटाएं
  9. तीनो मुक्तक बहुत सुन्दर हैं .१८५० वीं पोस्ट की बधाई
    latest post: क्षमा प्रार्थना (रुबैयाँ छन्द )
    latest post कानून और दंड

    उत्तर देंहटाएं
  10. तीनों मुक्तक दिल को छूते हैं ... भावपूर्ण ...
    १८५० रचनाओं की बधाई ... राम राम जी ...

    उत्तर देंहटाएं
  11. 1850वीं पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई,और शुभकामनाए,तीनो मुक्तक बहुत सुन्दर हैं .

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails