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बुधवार, 25 सितंबर 2013

"दोहे-मत का दान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

प्रजातन्त्र में प्रजा ही, चुनती है सरकार।
पाँच साल के बाद में, मिलता यह अधिकार।।

उसको अपना वोट दो, जो हो पानीदार।
संसद में पहुँचे नहीं, कोई भी मक्कार।।

अगर देश का चाहते, करना कुछ उत्थान।
सोच-समझकर कीजिए, अपने मत का दान।।

हथकण्डे हर तरह के, अपनायेंगे लोग।
लेकिन चुनना उन्हीं को, जो शासन के योग।।

भिक्षुक बन कर आयेंगे, फिर से बेईमान।
शासन-सत्ता पाय कर, बन जाते धनवान।।

लुभावने नारे लगा, बोलेंगे मृदु बोल।
मक्कारों की बात पर, मत जाना तुम डोल।।

अपने मत की शक्ति को, अब तो लो पहचान।
जनता के है हाथ में, आँसू औमुस्कान।।

10 टिप्‍पणियां:

  1. अपने मत की शक्ति को, अब तो लो पहचान।
    जनता के है हाथ में, आँसू औ’ मुस्कान।

    ।बहुत सुंदर रचना !

    नई रचना : सुधि नहि आवत.( विरह गीत )

    उत्तर देंहटाएं
  2. लोकतन्त्र की शक्ति का सभी उपयोग करें।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार गुरुदेव-

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुंदर रचना...
    आप की ये रचना आने वाले शुकरवार यानी 27 सितंबर 2013 को नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है... ताकि आप की ये रचना अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    आप भी इस हलचल में सादर आमंत्रित है... आप इस हलचल में शामिल अन्य रचनाओं पर भी अपनी दृष्टि डालें...इस संदर्भ में आप के सुझावों का स्वागत है...


    उजाले उनकी यादों के पर आना... इस ब्लौग पर आप हर रोज कालजयी रचनाएं पढेंगे... आप भी इस ब्लौग का अनुसरण करना।



    आप सब की कविताएं कविता मंच पर आमंत्रित है।
    हम आज भूल रहे हैं अपनी संस्कृति सभ्यता व अपना गौरवमयी इतिहास आप ही लिखिये हमारा अतीत के माध्यम से। ध्यान रहे रचना में किसी धर्म पर कटाक्ष नही होना चाहिये।
    इस के लिये आप को मात्रkuldeepsingpinku@gmail.com पर मिल भेजकर निमंत्रण लिंक प्राप्त करना है।



    मन का मंथन [मेरे विचारों का दर्पण]

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी यह प्रस्तुति 26-09-2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी यह सुन्दर रचना दिनांक 27.09.2013 को http://blogprasaran.blogspot.in/ पर लिंक की गयी है। कृपया इसे देखें और अपने सुझाव दें।

    उत्तर देंहटाएं
  7. लोकतंत्र का मंत्र यही अब कोई नहीं प्रजा हो।
    कोई राजा नहीं यहाँ जिसका दरबार सजा हो॥

    अब तो जनता मालिक है वोटों से हुक्म सुनाये।
    पाँच वर्ष में घुटने के बल उनके सेवक आयें॥

    ना मालिक नौकर का रिश्ता राजा और प्रजा का।
    संविधान में प्राविधान है सबको एक सजा का॥

    उत्तर देंहटाएं
  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं

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