मैदानों में कुहरा
छाया।
सितम बहुत सरदी ने
ढाया।।
![]()
सूरज को बादल ने
घेरा,
शीतलता ने डाला
डेरा,
ठिठुर रही है सबकी
काया।
सितम बहुत सरदी ने
ढाया।।
![]()
कलियों पर मौसम के
पहरे,
बहुत निराश हो रहे
भँवरे,
गुंजन उनको रास न
आया।
सितम बहुत सरदी ने
ढाया।।
सरसों के सब बिरुए
रोते,
गेहूँ अपना धीरज खोते
है,
हरियाली का हुआ
सफाया।
सितम बहुत सरदी ने
ढाया।।
![]()
बया नीड़ से झाँक
रही है,
इधर-उधर को ताँक
रही है,
शीतलता ने हाड़
कँपाया।
सितम बहुत सरदी ने
ढाया।।
![]()
बूढ़े-बच्चे काँप
रहे हैं,
सभी आग को ताप रहे
हैं,
हिम पर्वशिखरों पर छाया।
सितम बहुत सरदी ने
ढाया।।
|
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |




बहुत बढ़िया-
जवाब देंहटाएंआभार गुरु जी-
आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (10.01.2014) को " चली लांघने सप्त सिन्धु मैं (चर्चा -1488)" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है,नव वर्ष की मंगलकामनाएँ,धन्यबाद।
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया-
जवाब देंहटाएंसर्दी को बहुत सुंदर चित्रमयी कविता से अंकित किया है आपने, अतिसुंदर...साधुवाद;-))
जवाब देंहटाएंसादर,
सारिका मुकेश
सर्दी का बहुत अच्छा और लयात्मक चित्रण !!!
जवाब देंहटाएंअति सुँदर !!!
- बाँकवि
बहुत सुन्दर चित्र और रचना |
जवाब देंहटाएंसितम बहुत सरदी ने ढाया
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर.
जवाब देंहटाएंकल 11/01/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
जवाब देंहटाएंधन्यवाद!
बया नीड़ से झाँक रही है,
जवाब देंहटाएंइधर-उधर को ताँक रही है,
शीतलता ने हाड़ कँपाया।
सितम बहुत सरदी ने ढाया।।
सर्दी का बहुत सुन्दर चित्रण
जवाब देंहटाएं