"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

गुरुवार, 10 जुलाई 2014

"दोहे-माँ-ममता और दुलार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


जगदम्बा के रूप में, रहती है हर ठाँव।
माँ के आँचल में सदा, होती सुख की छाँव।१।

ममता का जिसकी नहीं, होता कोई अन्त।
माँ के ही दिल में बसा, करुणा-प्यार अनन्त।२।

मतलब का संसार है, मतलब के उपहार।
लेकिन दुनिया में नहीं, माता जैसा प्यार।३।

लालन-पालन में दिया, ममता और दुलार।
बोली-भाषा को सिखा, माँ करती उपकार।४।

होता है सन्तान का,  माता का सम्वाद।
माता को करते सभी, दुख आने पर याद।५।

नारायण से भी बड़ी, नारी की है जात।
सृजन कर रही सृष्टि का, इसीलिए है मात।६।

 पत्नी, पुत्री, बहन का, मात-पिता का प्यार।
उनको ही मिलता सदा, जिनका हृदय उदार।७।

जिसके सिर पर हो सदा, माता का आशीष।
वो ही तो कहलायगा, वाणी का वागीश।८।

माता केवल एक है, गुणवाची हैं “रूप”।
माता की सन्तान हैं, रंक-भिखारी-भूप।९।

10 टिप्‍पणियां:

  1. माँ की ममता की कोई बराबरी नही क़र सकता। बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति।
    आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (11.07.2014) को "कन्या-भ्रूण हत्या " (चर्चा अंक-1671)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

    उत्तर देंहटाएं

  2. जिसके सिर पर हो सदा, माता का आशीष।
    वो ही तो कहलायगा, वाणी का वागीश।८।

    बहुत सुंदर !

    उत्तर देंहटाएं
  3. अति सुन्दर ....मर्मस्पर्शी दोहे

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति आ. धन्यवाद !
    आपकी इस रचना का लिंक कल दिनांक - ११ . ७ . २०१४ को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर होगा , कृपया पधारें धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  5. मित्र! माताजी को मेरा प्रणाम ! बहुत भावुकता-पूर्ण रचना !

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुन्दर
    माताजी को मेरा प्रणाम-
    आभार आदरणीय-

    उत्तर देंहटाएं
  7. माँ जैसा प्यार ममता और भला किसकी !!
    बढ़िया गीत !

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति सर...बधाई

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails