"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 8 जुलाई 2014

"पल रहीं कैदियों की तरह" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


जिन्दगी चल रही चिमनियों की तरह।
बेटियाँ पल रहीं कैदियों की तरह।।

लाडलों के लिए पूरे घर-बार हैं,
लाडली के लिए संकुचित द्वार हैं,
भाग्य इनको मिला कंघियों की तरह।
बेटियाँ पल रही कैदियों की तरह।।

रंक माता पिता की हैं मुश्किल बढ़ी,
ताड़ सी पुत्रियों की हैं चिन्ता बड़ी,
भूख नर की बढ़ी भेड़ियों की तरह।
बेटियाँ पल रही कैदियों की तरह।।

शादियों में बहुत माँग जर की बढ़ी,
नोट की गड्डियों पर नजर हैं गड़ी,
रोग है बढ़ रहा कोढ़ियों की तरह।
बेटियाँ पल रही कैदियों की तरह।।

इक सुख़नवर को पीड़ा रहेगी सदा,
लेखनी दर्द इनका लिखेगी सदा,
 क्योंकि ससुराल है बेड़ियों की तरह।
बेटियाँ पल रही कैदियों की तरह।।

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्छी रचना व लेखनी , आ. धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  3. अच्छी संवेदनात्मक रचना के लिए बहुत-बहुत बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  4. सही है

    रेल बजट में नहीं दिखा 56 इँच का सीना !
    http://aadhasachonline.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं

  5. "पल रहीं कैदियों की तरह" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

    रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    उच्चारण

    जिन्दगी चल रही चिमनियों की तरह।
    बेटियाँ पल रहीं कैदियों की तरह।।

    लाडलों के लिए पूरे घर-बार हैं,
    लाडली के लिए संकुचित द्वार हैं,
    भाग्य इनको मिला कंघियों की तरह।
    बेटियाँ पल रही कैदियों की तरह।।

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails