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रविवार, 20 जुलाई 2014

‘‘चारों ओर भरा है पानी’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

खटीमा में बाढ़ के ताज़ा हालात
जब सूखे थे खेत-बाग-वन,
तब रूठी थी बरखा-रानी।
अब बरसी तो इतनी बरसी,
घर में पानी, बाहर पानी।।
बारिश से सबके मन ऊबे,
धानों के बिरुए सब डूबे,
अब तो थम जाओ महारानी।
घर में पानी, बाहर पानी।।
दूकानों के द्वार बन्द हैं,
शिक्षा के आगार बन्द है,
राहें लगती हैं अनजानी।
घर में पानी, बाहर पानी।।
गैस बिना चूल्हा है सूना,
दूध बिना रोता है मुन्ना,
भूखी हैं दादी और नानी।
घर में पानी, बाहर पानी।।
बाढ़ हो गयी है दुखदायी,
नगर-गाँव में मची तबाही,
वर्षा क्या तुमने है ठानी।
घर में पानी, बाहर पानी।।
--
कुछ और चित्र








11 टिप्‍पणियां:

  1. बाहर भीतर पानी फूटा कुम्भ जल जलहि सामना ये तथ कथ्यो गियानी...

    उत्तर देंहटाएं
  2. खटीमा में जल ही जल है।
    अन्यत्र मेघ वृष्टि की आवश्यकता है।
    बडी विषम सास्थिति है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुंदर प्रस्तुति , आप की ये रचना चर्चामंच के लिए चुनी गई है , सोमवार दिनांक - 21 . 7 . 2014 को आपकी रचना का लिंक चर्चामंच पर होगा , कृपया पधारें धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  4. ऐसी स्थिति में कुछ दिक्‍कतें भी आती हैं ... कहीं बारिश का ये हाल है तो कही जप किये जा रहे हैं कि बारिश हो .... सचित्र प्रस्‍तुति का आभार
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  5. अति -वर्षा की मार्फ़त प्रकृति की अपनी रुसवाई सामने आई है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. अति हर चीज की बुरी होती है |भगवान भी बराबरी से बटवारा नहीं करता |वहां अति की वर्षा और यहाँ सूखा |कैसी विडम्बना है |गीत बहुत अच्छा लगा |

    उत्तर देंहटाएं
  7. बादल रानी ,खटीमा में इतना ना बरसो ,थम जाओ!
    झीलें पुणे के सब सूखे पड़े हैं ,इधर बरस जाओ |
    कर्मफल |

    उत्तर देंहटाएं
  8. कबीर ने इसीलिए कहा है..अति का भला न बरसना अति की भली न धूप..

    उत्तर देंहटाएं

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