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गुरुवार, 24 जुलाई 2014

“हिन्दी व्यञ्जनावली-पवर्ग” (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

कल अन्तस्थ और परसों ऊष्म पर
मुक्तक लगाने है!
उसके बाद फिर से
अपने रंग में आ जाऊँगा!
“व्यञ्जनावली-पवर्ग” 
patti1_thumb[5] 
-- 
"प"
makar sankranti kite shop wallpapers
"प" से पर्वत और पतंग!
पत्थर हैं पहाड़ के अंग!
मानो तो ये महादेव हैं,
बहुत निराले इनके ढंग!!
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"फ"
fruits_ 
फ से फल गुण का भण्डार!
फल सबसे अच्छा आहार! 
फ से बन जाता फव्वारा,
फव्वारे की ऊँची धार!!
-- 
"ब"
 
"ब" से बरगद है बन जाता!
घनी छाँव हमको दे जाता!
ब से बगुला, बकरी-बच्चा,
बकरी-बकरा पत्ते खाता!!
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"भ"
  
   "भ" से भगत, भक्ति में लीन!
तन-मन ईश्वर में तल्लीन!!
कर्म भाग्य का निर्माता है,
अकर्मण्य जन भाग्य-विहीन!!
 --
"म"
IMG_0856
"म" से मछली जल की रानी!
मछली का जीवन है पानी! 
माता का नाता ममता से,
ममता कभी नही बेगानी!!

7 टिप्‍पणियां:

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