"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 15 जुलाई 2014

"बाकी बच गया अंडा" (बाबा नागार्जुन की कविता-प्रस्तोता-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों! 
यह मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है कि 1988-89 में
मुझे बाबा नागार्जुन की सेवा करने का सौभाग्य मिला था।
बाबा उन दिनों खटीमा में मेरे निवास को धन्य किया था।
बाबा को नमन करते हुए उनकी यह रचना 
आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहा हूँ।
(चित्र में....-मैं स्वयं, बाबा नागार्जुन, मेरी माता जी, मेरी श्रीमती जी और मेरा छोटा पुत्र विनीत। स्कूटर तैयार है घुमक्कड़ प्रकृति के बाबा नागार्जुन को घुमाने के लिए)
--
बाबा नागार्जुन की कविता- 
"बाकी बच गया अंडा" 
--
"पाँच पूत भारत माता के, दुश्मन था खूंखार
गोली खाकर एक मर गया, बाकी रह गये चार
चार पूत भारत माता के, चारों चतुर प्रवीन
देश निकाला मिला एक को, बाकी रह गये तीन
तीन पूत भारत माता के, लड़ने लग गए वो
अलग हो गया उधर एक, अब बाकी बच बच गए दो
दो बेटे भारत माता के, छोड़ पुरानी टेक
चिपक गया है एक गद्दी से, बाकी बच गया है एक
एक पूत भारत माता का, कंधे पर है झंडा
पुलिस पकड़ के जेल ले गई,
बाकी बच गया अंडा!"

5 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति- -
    आभार आपका-

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह! बाबा की इतनी पुरानी फोटो भी साथ में और रचना पढ़के मन को बहुत अच्छा लगा ..
    प्रेरक यादें ..

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails