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शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

"कवर्ग” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

व्यञ्जनावली-कवर्ग
"क"
"क" से कलम हाथ में लेकर!
लिख सकते हैं कमल-कबूतर!!
"क" पहला व्यञ्जन हिन्दी का,
भूल न जाना इसे मित्रवर!!
--
"ख"
"ख" से खम्बा और खलिहान!
खेत जोतता श्रमिक किसान!!
"ख" से खरहा और खरगोश,
झाड़ी जिसका विमल वितान!!
--
"ग"
"ग" से गङ्गा, गहरी धारा!
गधा भार ढोता बेचारा!!
"ग" से गमला घर में लाओ,
फूल उगाओ इसमें प्यारा!!
--
"घ"
"घ" से घण्टा-घर-घड़ियाल!
घड़ी देख कर समय निकाल!!
"घ" से घड़ा भरो पानी से,
जल पी कर हो जाओ निहाल!!
--
"ङ"
"ग" को नाक बन्द कर बोलो!
अब अपने मुँह को तुम खोलो!!
"ङ" का उच्चारण गूँजेगा,
कानों में मिश्री सी घोलो!!

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