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शनिवार, 12 जुलाई 2014

"शीतल फल हुए रसीले" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

♥ प्लम ♥
गया आम का मौसम,
प्लम बाजारों में अब छाया।
इनको देख-देख कर देखो,
सबका मन ललचाया।।

 
लाल-लाल हैं जितने पोलम,
वो हैं खट्टे-मीठे,
लेकिन जो महरून रंग के,
वो लगते हैं मीठे,
पर्वत से शृंगार उतर कर,
मैदानों में आया।

अल्मौड़ा, चौखुटिया,
नैनीताल और चम्पावत,
प्लम के पेड़ों के बागीचे,
फैले हैं बहुतायत,
हरे-भरे इन वृक्षों ने है,
मन को बहुत लुभाया। 
ये मौसम की मार झेलकर,
कितने हुए रसीले,
बारिश का पानी पीकर,
हो जाते नीले-पीले,
बच्चों और बड़ों ने इनको
बहुत चाव से खाया।  

8 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर व मनोहारी रचना , आदरणीय धन्यवाद !
    || जय श्री हरिः ||

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, रविवार, दिनांक :- 13/07/2014 को "तुम्हारी याद" :चर्चा मंच :चर्चा अंक:1673 पर.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बढ़िया प्रस्तुति।
    गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामना !

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह क्या खूब र ! गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामना ! विषयानुकूल स्वादु रचना

    उत्तर देंहटाएं
  5. मौसम की मार झेलकर,
    कितने हुए रसीले,
    बारिश का पानी पीकर,
    हो जाते नीले-पीले,
    बच्चों और बड़ों ने इनको
    बहुत चाव से खाया।
    bahut sundar v rasili prastuti .aabhar

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुंदर, मीठी..फलदार रचना :)

    उत्तर देंहटाएं

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