"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शनिवार, 26 जुलाई 2014

“हिन्दी वर्णमाला-ऊष्म और संयुक्ताक्षर” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!
आज हिन्दी वर्णमाला की 
अन्तिम कड़ी में प्रस्तुत हैं
ऊष्म और संयुक्ताक्षर
सबसे पहले देखिए..
--
से बन जाता षटकोण!
षड्दर्शन, षड्दृष्टिकोण! 
षट्-विद्याओं को धारणकर,
बन जाओ अर्जुन और द्रोण!!
-- 
से शंकर हैं भगवान!
शम्भू जी हैं कृपानिधान!
खाओ शहद, शरीफा मीठा,
कभी न कहलाना शैतान!!  
-- 
से संविधान, सरकार,
संसद में बैठा सरदार!
विजय सत्य की ही होती है,
झूठों की हो जाती हार!!
 --
से हल को हाथ लगाओ!
हरियाली धरती पर लाओ!
सरल-सुगम है हिन्दी भाषा,
देवनागरी को अपनाओ!!
--
दो या दो से अधिक अक्षरों की
सन्धि से मिलकर बने अक्षरों को
संयुक्ताक्षर कहते हैं!
हिन्दी वर्णमाला के साथ
इनको पढ़ाया जाना सर्वथा अनुपयुक्त है!
फिर भी आजकल के शिक्षाविदों ने
ये संयुक्ताक्षर 
वर्णमाला के साथ जोड़ दिये हैं !
लगे हाथ इन पर भी
एक-एक मुक्तक देख लीजिए!
--
"क्ष"
ksh
क् और श मिल क्षबन जाता!
"क्ष" से ही क्षत्रिय कहलाता!
क्षमा बहुत ही अच्छा गुण है,
वेद हमें यह ही बतलाता!!
--
"त्र"
tra
त् और र मिल बने त्रिशूल!
तीन नुकीले इसमें शूल!
तीन कोण वाले त्रिभुज को,
बच्चों कभी न जाना भूल!
--
"ज्ञ"
gyan
ज् और ञ मिल "ज्ञ" बन जाता
ज्ञानी हमको ज्ञान सिखाता!
गुरूद्वारों में जाकर देखो,
ग्रन्थी ज्ञानी-जीकहलाता!!
"श्र"
sra
श् और र मिल श्र बन जाता!
श्रम करने से धन मिल जाता!
श्री लक्ष्मी का है वरदान,
श्रमिक देश का भाग्य-विधाता!!

3 टिप्‍पणियां:

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails